नई दिल्ली 2026-05-25
सिक्किम में सैकड़ों श्रद्धालु, भिक्षु और गणमान्य व्यक्ति गंगटोक में चौथे दोद्रुपचेन रिनपोचे, जिग्मे थुप्टेन ट्रिनले पालजांगपो के पार्थिव अवशेष- ‘कुडुंग’ की अंतिम यात्रा और प्रतिष्ठापन समारोह में एकत्र हुए।
लुक्ष्यामा से देओराली चोर्टेन गोम्पा तक निकली इस अंतिम यात्रा के दौरान प्रार्थना, मंत्रोच्चार और पारंपरिक बौद्ध अनुष्ठान संपन्न किये गये। श्रद्धालुओं ने रिनपोचे को श्रद्धांजलि अर्पित की और अंतिम विदाई दी।
पावन कुडुंग को देओराली बौद्ध मठ स्थित स्वर्ण अवशेष स्तूप में विधिवत स्थापित किया गया। यह बौद्ध मठ रिनपोचे की करुणा, आध्यात्मिक ज्ञान और चिरस्थायी विरासत का शाश्वत प्रतीक है।
इस अवसर पर, मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने थोंगड्रोल खंगजांग का उद्घाटन किया जिसमें रिनपोचे के जीवनकाल में उपयोग में आये पावन अवशेष और व्यक्तिगत वस्तुएं संरक्षित रखी गई हैं।