सुशासन तिहार छत्तीसगढ़ शासन की एक संवेदनशील पहल है, जिसका उद्देश्य गाँवों और शहरों के द्वार पर पहुंचकर आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना और शासन-प्रशासन के प्रति जनविश्वास को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में गत माह आयोजित इस अभियान के तहत जनता से सीधे संवाद और विकास कार्यों को गति दी जाती है। अधिक जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ शासन पोर्टल पर जा सकते हैं।
बस्तर का आयतु हो या सरगुजा जिले का तिहारू, धमतरी जिले के आदिवासी बहुल नगरी अंचल के ईतवारी राम कमार अपनी बात बेबाकी से प्रदेश के मुखिया विष्णु देव साय के समक्ष खड़े होकर कह सकता है कि साहब हमारे यहां पीडीएस यानी सरकारी उचित मूल्य ...
शिशु जीवन का वह नाजुक चरण है, जहाँ सही पोषण और स्वास्थ्य देखभाल उनके भविष्य की दिशा तय करती है। भारत जैसे विकासशील देश में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और विभिन्न संक्रामक बीमारियों की दर को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग द्वारा 'शिशु संरक्षण माह' का आयोजन किया जाता है। यह एक विशेष स्वास्थ्य अभियान है, जो नवजात और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच का कार्य करता है। बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को सुधारने के लिए चलाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है। छत्तीसगढ़ राज्य में इस अभियान का नया चरण 18 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है, जिसके तहत 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों की ...
छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला आज मानव-हाथी द्वंद प्रबंधन के क्षेत्र में देश के लिए एक प्रेरणादायी मॉडल के रूप में उभर रहा है। जहां एक ओर हाथियों के प्राकृतिक आवास और विचरण मार्गों के संरक्षण पर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आमजन की सुरक्षा, त्वरित राहत और आधुनिक तकनीक के माध्यम से मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में लगातार नवाचार किए जा रहे हैं।
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन और कटघोरा वनमंडल के डीएफओ श्री कुमार निशांत के नेतृत्व में जिला प्रशासन और वन विभाग ने समन्वित प्रयासों का ऐसा मॉडल विकसित ...
छत्तीसगढ़ी संस्कृति में लोक-त्योहारों की एक समृद्ध परंपरा रही है, जिसमें प्रकृति, कृषि और जीव-जंतुओं के प्रति गहरा सम्मान झलकता है। इन्हीं त्योहारों में सबसे पहला और प्रमुख त्यौहार है — हरेली तिहार। सावन माह की अमावस्या (हरियाली अमावस्या) को मनाया जाने वाला यह पर्व छत्तीसगढ़ के लोक-जीवन, कृषि परंपरा और पर्यावरण-प्रेम का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ की पहचान सिर्फ उसकी प्रकृति नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराएँ भी हैं।
छत्तीसगढ़ के लोक जीवन में पर्व और त्यौहारों की बहुलता है। प्रत्येक माह कोई न कोई त्यौहार यहाँ लोक मानस को अपने रंग में रंग लेता है। ये त्यौहार जहॉं लोक जीवन में हंसी-खुशी के अवसर उपलब्ध कराती हैं, वहीं खेल और मनोरंजन के अनुकूल साबित होते हैं। प्रकति का यह हरापन ...
पिछले ढाई साल में श्रम विभाग ने गढ़ी सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि की मिसाल। छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अनेक ऐतिहासिक पहल की हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने श्रमिक कल्याण को केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे सुशासन, पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार से जोड़ते हुए श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है। वहीं श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में विभाग ने श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ तेज़ी और सरलता से पहुंचाने के लिए व्यापक सुधार किए हैं।
श्रमिकों की सामाजिक एवं...
कश्मीरी पश्मीना की नरम गर्माहट से लेकर असम के मूंगा सिल्क की शानदार चमक तक, राजस्थानी बांधनी के जीवंत ज्यामितीय पैटर्न से लेकर कांजीवरम सिल्क की सदाबहार और बेहतरीन बनावट तक, भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता धागों से बुना एक जीता-जागता नक्शा है। आज, सभ्यता की यह बेमिसाल तस्वीर एक ही छत के नीचे एक साथ नज़र आ रही है। नई दिल्ली के प्रसिद्ध भारत मंडपम में 14 से 17 जुलाई तक भारत टेक्स 2026 का आयोजन, हमारे देश की खूबसूरत विविधता को एक ही मंच पर ला रहा है।
वस्त्र उद्योग सिर्फ हमारी विरासत की झलक नहीं है, यह भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक ढांचे की एक मज़बूत नींव भी है। यह क्षेत्र लगातार विकास और समानता का एक बहुत बड़ा इंजन बना हुआ है, जो ...
आज, 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं।
श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से मिल सकता था। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी की गिनती अपने समय के महान शिक्षाविदों में होती थी। लेकिन तमाम सुविधाओं के बावजूद श्यामा प्रसाद जी ...
जब फरवरी के अंत में होर्मुज की खाड़ी बंद हुई, तो भारत सरकार ने एक प्राथमिकता का चयन किया - हमारे देश के नागरिकों, विशेष रूप से सबसे कमजोर समुदायों, को अभूतपूर्व आपूर्ति और मूल्य व्यवधानों से सुरक्षित रखना। इस प्राथमिकता के आस-पास ही अन्य प्रयास किये जाने थे। यह भावना खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की थी और यह आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा व्यवधान के लगभग चार महीनों तक बनी रही।
तथ्यों के पता चलने से पहले ही भारत को लेकर निर्णय किये जा रहे थे: तर्क यह था कि एक ऐसा देश, जो अपने कच्चे तेल का 85% से अधिक आयात करता है, होर्मुज के बंद होने से संभल नहीं पायेगा, जिससे होकर दुनिया का 20-30% से अधिक हाइड्रोकार्बन गुजरता है। पेट्रोल पंप में कुछ ही दिनों में ...
कुछ क्षण केवल एक उपलब्धि भर नहीं होते, वे एक पूरी यात्रा को रोशन कर देते हैं। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के लिए चार पंचायती राज पहलों का चयन ऐसा ही एक क्षण है, ऐसा क्षण जो किसी एक कार्यालय का नहीं, बल्कि हर ग्राम पंचायत और हर उस नागरिक का है, जिसने डिजिटल रूप से सशक्त ग्रामीण भारत के सपने पर भरोसा किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदृष्टि से प्रेरित होकर, भारत की पंचायतें भरोसे, तकनीक और परिवर्तन का एक नया अध्याय लिख रही हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन के बारह परिवर्तनकारी वर्षों के इस पड़ाव पर यह सम्मान विशेष महत्व रखता है। यह दर्शाता है कि किस प्रकार पंचायती राज संस्थाएं मात्र योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित ...
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में जशपुर जिला तेजी से एक उभरते पर्यटन स्थल के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है।
जशपुर अपनी प्राकृतिक सौंदर्य, हरि भरी वादियां नदी, पहाड़ झरने आदिवासी संस्कृति रहन-सहन लोक संस्कृति से परिपूर्ण, शहरों के भागदौड़ की जिन्दगी से दूर सुकुन बिताने के लिए जशपुर लोगों को अपनी ओर सहज ही आकर्षित करता है।
पर्यटन की बात करें तो जशपुर में ऐसे कई पर्यटन स्थल हैं जहां आकर मन को एक अलग सुकुन की अनुभूति कराता है। जशपुर जिले में देश देखा,रानीदाह जलप्रपात ,चाय बगान,दमेरा, कुनकुरी विकास खंड में मयाली नेशचर कैम विश्व सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर पहाड़, बगीचा...
छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अपनी प्राकृतिक संपदा, घने वनों, पहाड़ियों और मनमोहक जलप्रपातों के लिए पूरे प्रदेश में विशेष पहचान रखता है। इन्हीं प्राकृतिक धरोहरों में शामिल है रानीदाह जलप्रपात, जो अपनी अलौकिक सुंदरता, शांत वातावरण और ऐतिहासिक लोककथाओं के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। जशपुर नगर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह पर्यटन स्थल प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफी के शौकीनों और रोमांच पसंद पर्यटकों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
रानीदाह तक पहुँचने का सफर भी अपने आप में यादगार अनुभव है। हरियाली से आच्छादित पहाड़ियों, घने साल के जंगलों और घुमावदार खूबसूरत सड़कों से गुजरते हुए जैसे ही पर्यटक इस स्थल पर पहुँचते हैं, सामने ऊँची चट्टानों से गिरती ...
दशकों तक, भारत की नियामक प्रणाली नागरिकों को गहरे अविश्वास की नज़र से देखती थी। नागरिकों को मामूली, प्रक्रियात्मक गलतियों या किसी अधिकारी के केवल शक के आधार पर अपराधी मान लिया जाता था। एक सुखद बदलाव के तौर पर, मोदी सरकार ने आम आदमी के लिए भरोसे और सहानुभूति पर आधारित नीतियां बनाई हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों और व्यवसायों का समर्थन करने, अनुपालन को सरल बनाने और व्यवसायों के सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को स्वीकार करते हुए भारत के कानूनी परिदृश्य में सुधार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। चाहे अनुपालन बोझ कम करना हो, डिजिटलीकरण हो, या एकल-खिड़की मंजूरी हो, कुल मिलाकर बदलाव का मकसद शासन को अधिक तर्कसंगत और कुशल बनाना रहा है। ...
किसी भी राष्ट्र की प्रगति का वास्तविक पैमाना उसकी सड़कों, भवनों और उद्योगों से नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से तय होता है जो अपने सबसे संवेदनशील नागरिकों की रक्षा करती है। गर्भवती महिलाएं और नवजात शिशु किसी भी समाज की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होते हैं। जब एक मां सुरक्षित रहती है तो केवल एक जीवन नहीं बचता, बल्कि एक पूरे परिवार, समाज और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
भारत ने पिछले एक दशक में मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में जिस परिवर्तनकारी यात्रा को तय किया है, वह विश्व स्वास्थ्य क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उदाहरण के रूप में उभरी है। इस परिवर्तन के केंद्र में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) है, जिसने गर्भवती महिलाओं तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक व्यापक राष्ट्रीय ...
"जो राज्य अपनी सीमाओं, साझेदारियों और व्यापार मार्गों की सुरक्षा नहीं करता, वह अपने भविष्य को भी सुरक्षित नहीं रख सकता।"
- कौटिल्य
कौटिल्य की यह सीख सदियों पहले ही शासन और रणनीति की मूल सोच का हिस्सा बन चुकी थी, और आज के समय में यह पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक होकर सामने आई है। आज देशों की परीक्षा केवल उनकी अर्थव्यवस्था के आकार या सैन्य ताकत से नहीं हो रही, बल्कि इस बात से हो रही है कि वे भूगोल को कितनी अच्छी तरह समझते हैं, भविष्य का कितना सही अनुमान लगाते हैं और अवसर के खतरे में बदलने से पहले कितनी तेजी से निर्णय लेते हैं। ग्रेट निकोबार भारत के लिए ऐसी ही एक बड़ी परीक्षा है।
यह भारतीय मानचित्र के दक्षिणी-पूर्वी छोर ...
भारत और ओमान के बीच वाणिज्यिक रिश्ते सदियों से चलते आ रहे हैं। दोनों देशों का एक साझा इतिहास प्राचीन नावों के पाल पर सवार होकर आगे बढ़ता रहा है और पीढ़ियों से चले आ रहे सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जरिए कायम रहा है। भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) इस सभ्यतागत बंधन को और मजबूत करता है। एक ऐसे दौर में जब वैश्विक व्यापार भू-राजनैतिक प्रतिद्वंद्विताओं, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और बढ़ते संरक्षणवाद से जूझ रहा है, यह समझौता भरोसेमंद साझेदारों के साथ आर्थिक जुड़ाव को गहरा करने के भारत के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। वर्ष 2022 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद, यह सीईपीए खाड़ी देशों के साथ भारत की बढ़ती आर्थिक भागीदारी को मजबूती से स्थापित करता है। द्विपक्षीय व्यापार में लगातार विस्तार हुआ ...
1 जून से लागू हो रहा भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस मिशन की एक निर्णायक उपलब्धि है, जिसका लक्ष्य नए बाजार खोलने और रोजगार सृजन को गति देने के जरिये भारत के छात्रों, कारीगरों, महिलाओं, किसानों, मछुआरों और एमएसएमई के लिए वैश्विक समृद्धि के मार्ग बनाना है।
भारत और ओमान के बीच गहरे आर्थिक संबंध हैं और लोगों के आपसी संबंध प्रगाढ़ हैं। ओमान में लगभग 7 लाख भारतीय रहते हैं, जिनमें वे व्यापारी परिवार भी शामिल हैं, जिनकी जड़ें 200–300 साल पुरानी हैं। ओमान से भारत को भेजी जाने वाली वार्षिक धनराशि लगभग 2 बिलियन डॉलर है, जबकि देश में 6,000 से अधिक भारतीय उद्यम कार्यरत हैं। दोनों देशों के बीच ...
छत्तीसगढ़ में सुशासन और नागरिक सुविधाओं को केंद्र में रखकर प्रशासनिक व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। इसी दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के नेतृत्व में पंजीयन विभाग में ऐतिहासिक एवं परिवर्तनकारी सुधारों की शुरुआत की गई है। राज्य सरकार का उद्देश्य पंजीयन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी, तकनीक आधारित तथा नागरिकों के लिए पूरी तरह सुविधाजनक बनाना है।
कभी लंबी कतारों, घंटों इंतजार, दस्तावेजों के सत्यापन में देरी और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने वाली पंजीयन प्रक्रिया अब पूरी तरह बदलती दिखाई दे रही है। पहले जहां एक साधारण रजिस्ट्री पूरी करने में 4 से 6 घंटे अथवा कई बार 1 से 2 दिन तक लग जाते थे, वहीं अब आधुनिक डिजिटल व्यवस्थाओं की मदद से यही ...
छत्तीसगढ़ की माटी में इन दिनों विकास और सुशासन की एक नई बयार बह रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य ने प्रगति की एक ऐसी छलांग लगाई है, जो न केवल छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदल रही है, बल्कि इसे देश के नक्शे पर विकसित भारत का एक चमकता हुआ रोल मॉडल भी बना रही है। केंद्र की दूरदर्शी नीतियों और राज्य सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति के मेल से छत्तीसगढ़ में आज डबल इंजन की सरकार धरातल पर साफ महसूस की जा रही है। विकास की इस नई इबारत में समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की खुशहाली सबसे ऊपर है।
गरीब का अपना घर: पहली प्राथमिकता, ठोस कदम
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सत्ता संभालते ही सबसे पहला ...
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिला खेती और बागवानी के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। पारंपरिक खेती के साथ अब किसान नगदी एवं फल फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। सेब, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी और काजू जैसी फसलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रही हैं। इनमें काजू उत्पादन किसानों के लिए आय का मजबूत और भरोसेमंद साधन बनकर उभरा है।
काजू की खेती से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था
जिला प्रशासन, उद्यान विभाग, रीड्स और नाबार्ड के संयुक्त प्रयासों से जिले में काजू उत्पादन का दायरा तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में जिले के लगभग 7800 किसान करीब 7800 एकड़ भूमि ...
बुद्ध के दो मुख्य शिष्यों - अरहंत सारिपुत्त और अरहंत महामोग्गल्लान - के पवित्र अवशेष १ से १० जून तक उलानबटोर के गंदन मठ में प्रदर्शनी के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) के एक विशेष विमान से मंगोलिया ले जाए जाएंगे ।
दो सहस्राब्दियों से अधिक समय से, बौद्ध जगत में अरहंत सारिपुत्त और अरहंत महामोग्गल्लान के नाम अत्यधिक श्रद्धा के केंद्र रहे हैं । गौतम बुद्ध के दो मुख्य शिष्यों के रूप में, वे न केवल बुद्ध के सबसे करीबी आध्यात्मिक साथी थे, बल्कि उनके ज्ञानोदय के बाद धम्म के प्रमुख रक्षक और प्रसारक भी थे ।
बौद्ध परंपरा के अनुसार...
मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार की जरूरत होती है, ठीक उसी प्रकार फसलों के बेहतर विकास और अधिक उत्पादन के लिए संतुलित पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है। पौधे ऑक्सीजन वायुमंडल और पानी से प्राप्त करते हैं, जबकि अन्य आवश्यक पोषक तत्व मिट्टी से लेते हैं। इनमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश प्रमुख पोषक तत्व हैं, जिनकी कमी अधिकांश खेतों की मिट्टी में पाई जाती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया को ही मिट्टी परीक्षण कहा जाता है। मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं में खेत की मिट्टी का वैज्ञानिक विश्लेषण कर फसल की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों की अनुशंसा की जाती है। इससे किसानों को ...
हमारे देश भर में फैले जंगलों, पहाड़ियों और दूरदराज की बस्तियों में, एक शांत लेकिन सफल परिवर्तन चल रहा है। जनजातीय समुदाय लंबे समय से भारत की विकास गाथा के केंद्र में अपने उचित स्थान का इंतजार कर रहे थे। आज वे राष्ट्र की प्रगति के सक्रिय वास्तुकार के रूप में उभर रहे हैं। जनजातीय गरिमा उत्सव की यही भावना है: विकसित भारत की यात्रा का एक राष्ट्रीय उत्सव, जहां प्रगति भूगोल या परिस्थिति का विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का समान रूप से अधिकार है।
महत्वाकांक्षा का पैमाना
यह समझने के लिए कि प्रौद्योगिकी जनजातीय विकास के लिए अपरिहार्य क्यों हो गई है, किसी को पहले चुनौती की व्यापकता को समझना चाहिए। ...
जब मैं तिरुप्पुर के स्कूल में पढ़ता था, तब मेरे मन में देश को लेकर कई सपने थे। मेरे मन में अक्सर ये सवाल उठते थे- भारत अपनी महानता कब वापस पाएगा? विश्व मंच पर एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में कब उभरेगा? हमारे गरीब और वंचित भाई-बहनों को सम्मानजनक जीवन कब मिलेगा? मुझे खुशी है कि किशोरावस्था में मेरे मन में जो विचार थे, वे अब साकार हो रहे हैं।
मैं अक्सर खुद को स्वामी विवेकानंद के इन शब्दों की याद दिलाता था, "उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको।" तमिलनाडु की धरती से स्वामीजी के दिए ये शब्द हर व्यक्ति में देशभक्ति और समर्पण की भावना जगाने की अपार शक्ति रखते हैं। मेरा हमेशा यह विश्वास रहा कि जब भारत अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ेगा, तब वह पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करने वाला राष्ट्र बनकर उभरेगा। पिछले एक दशक में ...
आज जब दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 मना रही है, मानवता एक निर्णायक सभ्यतागत मोड़ पर खड़ी है। वर्तमान में हम अभूतपूर्व तकनीकी और भौतिक प्रगति के युग में जी रहे हैं, फिर भी हम जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों, बढ़ते मानसिक तनाव, पर्यावरणीय क्षरण और जीवन जीने के अस्थिर तरीकों जैसी चुनौतियों का सामना भी कर रहे हैं। इनमें से कई संकटों के मूल में एक ही चुनौती नज़र आती है- वस्तुओं का अनियंत्रित और बिना सोचे-समझे किया जाने वाला उपभोग।
प्राकृतिक संसाधनों के ज़रुरत से ज्यादा दोहन से लेकर डिजिटल उपयोगिता पर अत्यधिक निर्भरता और अस्थिर जीवनशैली तक, आज आधुनिक समाज संतुलन से लगातार दूर होता जा रहा है। और इसी संदर्भ में, योग न केवल एक प्राचीन स्वास्थ्य अभ्यास के रूप में, बल्कि एक ज़िम्मेदार जीवन जीने के ...
- इटली और भारत: इंडो-भूमध्यसागरीय क्षेत्र के लिए एक रणनीतिक साझेदारी
- सोमनाथ: भारत की अजेय आत्मा का प्रतीक! : श्री नरेंद्र मोदी
- सुशासन, संवेदना और सुरक्षा : श्रमिक हित में छत्तीसगढ़ सरकार के दो वर्ष : श्री छगनलाल लोन्हारे
- 2030 तक एचआईवी/एड्स महामारी को समाप्त करना भारत का अगला बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसर:सुश्री वी हेकाली झीमोमी