
पहलगाम में हुआ नरसंहार केवल निर्दोष लोगों के जीवन पर हमला नहीं था- यह भारत की अंतरात्मा पर भी किया गया आक्रमण था। इसके प्रत्युत्तर में भारत ने आतंकवाद-रोधी कार्रवाई की नियम पुस्तिका के पुनर्लेखन का निर्णय लिया। ऑपरेशन सिंदूर राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों की रक्षा के लिए मोदी सरकार की न बर्दाश्त करने और कोई समझौता नहीं करने की नीति यानी मोदी सिद्धांत की सबसे स्पष्ट अभिव्यक्ति है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने टेलीविजन पर राष्ट्र के नाम संबोधन में आतंकवाद से निपटने के लिए अपने इस सिद्धांत की रूपरेखा प्रस्तुत की। हाल की घटनाओं के आधार पर निर्मित यह सिद्धांत आतंकवाद और बाहरी खतरों पर भारत की प्रतिक्रिया के लिए निर्णायक तौर-तरीके निर्धारित करता है।

भारत का सहकारिता आंदोलन सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में गहराई से निहित है। यह आंदोलन समावेशी विकास, सामुदायिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के लिए एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में विकसित हुआ है। सहकारिता मंत्रालय की स्थापना और इसकी नवीनतम पहलों के माध्यम से सरकार ने एक सहकारिता-संचालित मॉडल को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है, जो देश के हर कोने तक पहुंचेगा और समाज की मुख्यधारा से अलग पड़े समुदायों के लिए स्थायी आजीविका और वित्तीय समावेशन की सुविधा प्रदान करेगा।
दिनांक 6 जुलाई 2021 को सहकारिता मंत्रालय की स्थापना भारत के सहकारी आंदोलन में एक परिवर्तनकारी क्षण था। सहकारी समितियों को पुनर्जीवित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ, मंत्रालय ने इस क्षेत्र को मजबूत और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक नीतिगत ढांचा, कानूनी सुधार और रणनीतिक पहल शुरू की है। अपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मंत्रालय ने सहकारी समितियों के लिए "व्यापार करने में आसानी", डिजिटलीकरण के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित करने और वंचित ग्रामीण समुदायों के लिए समावेशिता को बढ़ावा देने की अपनी पहल पर काफी जोर दिया है।

वक्फ संपत्तियां समुदाय के कल्याण के लिए होती हैं और यह कल्याण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा या धार्मिक उद्देश्यों से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, जमीन हड़पने, फर्जी दावों और राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्तियों द्वारा दुरुपयोग के मामलों ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। गरीबों की मदद करने के बजाय, इन संपत्तियों का इस्तेमाल अक्सर निजी लाभ के लिए किया जाता रहा है। यह नया विधेयक सुनिश्चित करता है कि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा की जाए और उनका इस्तेमाल इच्छा के मुताबिक किया जाए।
वक्फ संशोधन विधेयक 2024, वक्फ संपत्तियों में कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और अतिक्रमण के लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों का समाधान करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण विधायी कदम है। ये प्रस्तावित संशोधन पारदर्शिता बढ़ाने, कानूनी स्वामित्व सुनिश्चित करने और वक्फ बोर्डों के भीतर जवाबदेही व शासन के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करने पर केंद्रित हैं। वक्फ संपत्ति प्रबंधन में मुख्या चिंता उचित पहचान और डिजिटलीकरण की कमी रही है। यह विधेयक धारा 54 और 55 के प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करता है, जो अतिक्रमण की रोकथाम से संबंधित हैं। वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, यह विवादित संपत्तियों से संबंधित मुकदमों के शीघ्र निपटारे के साथ-साथ ऐसी सभी संपत्तियों की पहचान और डिजिटलीकरण को अनिवार्य बनाता है। इस तरह डिजिटल रिकॉर्ड रखने से अनधिकृत दावों और फर्जी लेनदेन पर अंकुश लगेगा। यह भी सुनिश्चित होगा कि वक्फ संपत्तियों का उपयोग उनके इच्छित धर्मार्थ और धार्मिक उद्देश्यों के लिए किया जा सके।

प्रामाणिक कहानियों और रचनात्मक मनोरंजन की भूखी दुनिया में, भारत वैश्विक मीडिया परिदृश्य में क्रांति लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। विश्व दृश्य-श्रव्य एवं मनोरंजन शिखर सम्मेलन (वेव्स) महज मीडिया और मनोरंजन से जुड़ा एक हितधारक भर नहीं है - यह एक ऐसे परिवर्तनकारी दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है जो दुनिया भर में रचनाकारों, नीति-निर्माताओं और दर्शकों के कंटेंट के साथ जुड़ने के तौर-तरीके को नए सिरे से परिभाषित करेगा। आगामी 1-4 मई, 2025 को मुंबई में आयोजित होने वाला वेव्स, संभवतः सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा रचनाकारों के इकोसिस्टम के लिए शुरू की गई एक ऐसी बेहद दूरदर्शी पहल के रूप में उभर कर सामने आया है, जो मनोरंजन के वैश्विक मंचों के लिए एक नया स्वर्णिम मानक स्थापित करेगा।
दशकों से भारत कहानी कहने की कला के क्षेत्र में एक महाशक्ति रहा है और अपनी फिल्मों, संगीत एवं डिजिटल कंटेंट के जरिए दुनिया को मंत्रमुग्ध करता रहा है। फिर भी, अपने विशुद्ध रचनात्मक सृजन के बावजूद, इस देश ने शायद ही कभी वैश्विक मनोरंजन उद्योग में भागीदारी की शर्तों को निर्धारित किया है। वेव्स उस कहानी को बदलना चाहता है। इसका नाता सिर्फ भारतीय रचनात्मकता को प्रदर्शित करने भर से नहीं है – इसका सरोकार मीडिया, मनोरंजन और प्रौद्योगिकी के इर्द-गिर्द होने वाली वैश्विक बातचीत को आकार देने से है। यदि दावोस आर्थिक नीति का केंद्र है और कान्स सिनेमा का मंदिर है, तो वेव्स का उद्देश्य नवाचार के सृजन और प्रमुख हितधारकों के सहयोग - 'कलात्मक प्रतिभा के संगम' - के जरिए मनोरंजन के भविष्य को परिभाषित करना है।

ट्रम्प प्रशासन अपने दूसरे कार्यकाल में टैरिफ और ‘अमेरिका को फिर से महान बनाने’ की नीतियों पर दोगुना जोर दे रहा है। ट्रम्प प्रशासन अतीत के गठबंधनों को फिर से परिभाषित और पुनर्लेखन करने का काम भी कर रहा हैजिसकी गूंज यूरोप और एशिया में उनके सहयोगियों द्वारा महसूस की जा रही है। इन कदमों का उद्देश्य व्यापार संतुलन में सुधार और सार्वजनिक व्यय को कम करके अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। अमेरिका ने पेरिस समझौते वविश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से खुद को अलग कर लिया है। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) से भी वह पहले ही अलग हो चुका है। ये कदम वैश्विक भू-राजनीतिक व्यवस्था में एक शून्य पैदा कर रहे हैं। यह शून्य लंबे समय तक नहीं रहेगा-इसे प्रतिस्पर्धी शक्तियों द्वारा भरा जाएगा। अमेरिका सबसे शक्तिशाली बना हुआ है औरहम एक बार फिर एक बहुध्रुवीय दुनिया का उदय देख रहे हैं। विखंडित वैश्वीकरण, तकनीकी वर्चस्व की लड़ाई, ऊर्जा की भू-राजनीति और ढहता वैश्विक शासन विश्व को नया आकार देने वाले प्रमुख भू-राजनीतिक रुझान हैं जिनसे भारत को निपटना होगा।

पिछले दशक में भारत की विकास गाथा में एक उल्लेखनीय बदलाव आया है और इस यात्रा का सबसे उत्साहवर्धक पहलू यह है कि इस देश की विकास गाथा में महिलाओं की भूमिका में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आज हम गर्व से यह कह सकते हैं कि भारत के विकास के एजेंडे के केन्द्र में ‘नारी शक्ति’ है। भारत महिलाओं को न केवल जमीनी स्तर पर सशक्त बना रहा है, बल्कि विकसित भारत के निर्माता के रूप में उनके नेतृत्व का मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है। महिलाओं को विकास के लाभार्थी के रूप में देखने से लेकर उन्हें परिवर्तन के वाहक के तौर पर पहचानने की दिशा में आया बदलाव, सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं पहलों द्वारा समर्थित है। जीवन की निरंतरता से संबंधित दृष्टिकोण के तहत तैयार की गई ये नीतियां महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और यह सुनिश्चित कर रही हैं कि उन्हें बचपन से लेकर शिक्षा, सम्मानजनक जीवन, मातृत्व, वित्तीय आजादी एवं आर्थिक एकीकरण के मामले में सहायता हासिल हो।
‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ और ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ जैसी शैक्षिक एवं पोषण संबंधी सहायता योजनाओं ने शिक्षा के क्षेत्र में लैंगिक असमानताओं को पाटने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन पहलों ने न केवल जन्म के समय लिंग अनुपात को बेहतर बनाने में मदद की है, बल्कि लैंगिक रूप से अपेक्षाकृत अधिक संतुलित समाज के निर्माण का आधार भी तैयार किया है। इसके अलावा, आंगनवाड़ी प्रणाली और पोषण अभियान जैसी पहलों ने महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य एवं कल्याण को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है। ये कार्यक्रम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि महिलाओं तथा युवतियों को वह पोषण एवं शिक्षा मिले जिसकी उन्हें अपने भविष्य की एक ठोस नींव रखने के लिए ज़रूरत है।

आज के इस तेज गति वाली 21वीं सदी में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में नित नई संभावनाएँ उभर रही हैं, विशेष रूप से आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी तकनीकों के माध्यम से। एआई न केवल महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजगार के नए अवसर प्रदान कर सकता है, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी समान भागीदार बनाने में मदद कर सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने G20 समिट से लेकर वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम तक, हर मंच पर ‘वूमेन-लेड डेवलपमेंट’ को बढ़ावा देने की बात कही है। इसके तहत महिलाओं को केवल विकास का लाभार्थी ही नहीं बल्कि नेतृत्वकर्ता भी माना जा रहा है। एआई इस दृष्टि से कई प्रकार से देश की विकास यात्रा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ा सकता है। चाहे रोजगार के नए अवसरों का सृजन करना हो या शिक्षा एवं कौशल विकास और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को सुगम बनाना, एआई हर क्षेत्र में अहम भूमिका निभा सकता है।
महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने में भी एआई महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। घरेलू हिंसा और उत्पीड़न की निगरानी के लिए एआई आधारित डेटा एनालिटिक्स और मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किए जा सकते हैं, जो महिलाओं के खिलाफ अपराधों को चिन्हित करने और उनके रोकथाम में मदद करेंगे। इसके अलावा, एआई-पावर्ड चैटबॉट्स कानूनी और सुरक्षा संबंधी सलाह देने में मददगार हो सकते हैं, जिससे महिलाएं किसी भी परिस्थिति में त्वरित सहायता प्राप्त कर सकें।

महाराष्ट्र के बारामती में एक छोटा किसान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के साथ कृषि के नियमों को फिर से निर्धारित करने में जुटा है। यह बात अपने-आप में अद्वितीय है। हम उर्वरक के इस्तेमाल में कमी, जल संसाधन के बेहतर इस्तेमाल से अधिक उपज के बारे में बात करते हैं, जो एआई समर्थित है। यह भारत की एआई-संचालित क्रांति की एक झलक मात्र है। तकनीक और नवाचार अब प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन को बखूबी बदल रहे हैं। कई अर्थों में इस किसान की कहानी एक बहुत बड़े परिवर्तन का सूक्ष्म रूप है। यह सूक्ष्म रूप 2047 तक विकसित भारत की ओर हमारे प्रस्थान का है।
डिजिटल नियति का निर्धारण
भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई), एआई, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पर जोर देकर अपने डिजिटल भविष्य को आकार दे रहा है। दशकों से, भारत सॉफ़्टवेयर के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी रहा है, किंतु अब यह हार्डवेयर विनिर्माण में भी बड़ी प्रगति कर रहा है। पांच सेमीकंडक्टर संयंत्र निर्माणाधीन हैं, जो वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारत की भूमिका को मजबूत करते हैं। आज इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद हमारे शीर्ष तीन निर्यातों में शुमार हैं और जल्द ही हम एक प्रमुख मील के पत्थर यानी इस साल भारत की पहली “मेक इन इंडिया” चिप के लॉन्च तक पहुंच जाएंगे।

राजू (बदला हुआ नाम), आयु 18 वर्ष, को सामान्य रूप से चलते हुए भी सांस लेने में तकलीफ होती थी और वह थकान महसूस करता था। साल 2017 में उसे सीने में दर्द के कारण दिल की गंभीर बिमारी से पीडि़त होने के बारे में पता चला। इलाज की अंतहीन जद्दोजहद में उसके पिता ने परिवार के मवेशी और जमीन तक बेच डाली और पांच लाख रुपये से अधिक रकम के कर्ज में डूब गए। साल 2019 में, उन्हें आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएमजेएवाई) की ओर से एक पत्र मिला,लेकिन उन्होंने इसको ज्यादा अहमियत नहीं दी। साल 2022 में, राजू की हालत बिगड़ गई, जिसके लिए फौरन सर्जरी करने की आवश्यकता थी। वे हताश और बेबस हो चुके थे। तभी अस्पताल के एक कर्मचारी ने उनके परिवार को पीएमजेएवाई के बारे में पता करने की सलाह दी और उनकी पात्रता की पुष्टि की। इसकी बदौलत राजू की लगभग 1.83 लाख रुपये की लागत वाली जीवन रक्षक सर्जरी संभव हो सकी । आखिरकार, 67 दिन बाद उसे नए सिरे से जिंदगी शुरु करने के लिए अस्पताल से छुट्टी दे मिल गई।

भारतीय कपड़ा उद्योग हमेशा से देश की अर्थव्यवस्था, परंपरा, संस्कृति और विरासत की आधारशिला रहा है। यह कृषि के बाद सबसे ज़्यादा रोज़गार सृजन करने वाले क्षेत्रों में से एक है और भारत के सकल घरेलू उत्पाद और निर्यात में इसका महत्वपूर्ण योगदान है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में विशेष तौर पर वैश्विक बाज़ार में, कई कारणों से इसने अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं किया। खासतौर पर भारतीय परिधान उद्योग, जो कपड़ा मूल्य श्रृंखला का सबसे महत्वपूर्ण घटक है, ने अनुभव किया कि वह महत्वपूर्ण बाज़ारों में टैरिफ़ लाभ लेने वाले कुछ कम विकसित और अल्प-विकसित देशों के समक्ष लागत प्रतिस्पर्धा की दौड़ में पिछड़ गया और इस तरह अपनी वास्तविक क्षमता के अनुरूप प्रगति नहीं कर पाया।
इस बात को ध्यावन में रखते हुए वैश्विक आयात पैटर्न के साथ उत्पाद की पेशकश को फिर से जोड़ने के लिए संपूर्ण पुनर्गठन और शीघ्र क्षमता वृद्धि की आवश्य कता थी। सरकार की पीएलआई और पीएममित्र पहलों द्वारा इसका काफी हद तक समाधान निकाला गया। आत्मविश्वास से परिपूर्ण उभरता भारत अपनी पूरी क्षमताके साथ आगे बढ़ने और पूरी ताकत झोंकने के लिए तैयार था। इसी दृष्टिकोण ने 2024 में भारत टेक्स के विचार को जन्म दिया।

एक दशक पहले तक भारतीय पर्यटन को पर्यटन क्षेत्र में अन्य देशों के समकक्ष या उनसे आगे स्थापित करने के लिए भी एक ब्रांड एम्बेसडर की जरूरत सामान्य बात थी । जिस तरह अन्य देश अपने देश के पर्यटन के प्रचार-प्रसार हेतु सुविख्यात फिल्मी सितारों और सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को आकर्षित करने के लिए विज्ञापन राशि खर्च कर रहे थे ठीक उसी तरह यहाँ भी यह महसूस किया गया कि अतुल्य भारत को एक नया रूप दिए जाने की आवश्यकता है ।
पिछले एक दशक में और पिछले 100 दिनों से भारत के केन्द्रीय पर्यटन मंत्री के रूप में कार्य करते हुए मैंने सभी को यह कहते सुना है कि इस देश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि हमारे बीच एक ऐसे नेता हैं जो न केवल हमारे प्रधानमंत्री हैं बल्कि वे अतुल्य भारत के सबसे बड़े वैश्विक ब्रांड एम्बेसडर और हिमायती हैं । अपनी हर भूमिका में, वे भारत की बेहतरी के लिए काम करते हैं । मैं यह देखकर अत्यंत विस्मित और प्रेरित होता हूँ कि माननीय प्रधानमंत्री सदैव पर्यटन को अत्यंत महत्व देते हैं ।

हमारे देश की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र एक प्रकाश-पुंज की तरह है, जो विकसित भारत की दिशा में हमारे द्वारा उठाए जा रहे कदमों के रूप में प्रतिबिम्बित होता है। अब यह क्षेत्र केवल अर्थव्यवस्था में योगदानकर्ता भर नहीं रह गया है, बल्कि तेजी से भारत की विकास गाथा का आधार बनता जा रहा है। माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में नीतियों, पहलों और बुनियादी ढांचे के विकास के बेहतरीन मिश्रण ने इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है, जिससे यह वैश्विक मंच पर एक मजबूत ताकत बनकर उभरा है। वर्तमान में भारत 3.7 ट्रिलियन डॉलर वाली समृद्ध अर्थव्यवस्था होने का दावा करता है, जिसका महत्वाकांक्षी लक्ष्य 2047 में देश की स्वतंत्रता की शताब्दी तक 30-35 ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्था बनना है।
भारत में हो रहे बदलावों के मूल में इसकी समृद्ध कृषि-जलवायु विविधता है, जो हमारे किसानों को विभिन्न प्रकार की विशिष्ट फसलें उगाने में सक्षम बनाती है। दालें, मोटे अनाज, दूध, गेहूं, चावल तथा फलों और सब्जियों के उत्पादन में वैश्विक स्तर पर अग्रणी देश होने के रूप में, भारत के पास मूल्य वर्धन के लिए संसाधनों का अद्वितीय आधार मौजूद है। हमारे मेहनतकश किसानों द्वारा सावधानीपूर्वक पोषित इस कृषि प्रचुरता ने नवाचार और उद्यमिता के दौर को जन्म दिया है, जिससे उन्नतिशील खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का उदय हुआ है।

मेरी बहनों, प्रधानमंत्री जी का संकल्प है किसी बहन के आंखों में आंसू न रहें, हर एक चेहरे पर मुस्कुराहट आए, कोई मजबूर न रहे, इसलिए उन्होंने लखपति दीदी अभियान चलाया है । ऐसी दीदी जिनकी सालाना आय 1 लाख से अधिक हो ऐसी 1 करोड़ दीदी, लखपति बन चुकी है और विगत 100 दिन में 11 लाख दीदी लखपति बनी है । हमारी सरकार इस अभियान में तेजी से जुटी हुई है । विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में प्रधानमंत्री जी के इस अभियान से लगातार महिलायें जुड़ रही है और स्व सहायता समूह के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रही है । मुझे विश्वास है कि प्रधानमंत्री जी के आशीर्वाद से जल्द ही 3 करोड़ दीदी लखपति दीदी बनेंगी। देश में महिलाएं आगे बढ़ें, समृद्ध और संपन्न बनें एवं प्रगति के नए आयाम स्थापित करें, इसके लिए विगत 10 वर्षों से महिला कल्याण के अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। मोदी जी देश के पहले प्रधानमंत्री है जिन्होंने महिलाओं के शैक्षणिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक सशक्तीकरण को सुनिश्चित किया है।
महिलाएं समाज और राष्ट्र की धुरी हैं। हमारे गौरवशाली और समृद्ध भविष्य का आधार हैं। हमारे वेदों और पुराणों में नारी के महत्व का उल्लेख किया गया है। नारी शक्ति के बिना राष्ट्र की समृद्धि की कल्पना नहीं की जा सकती है इसलिए प्रधानमंत्री जी ने नारी शक्ति के समग्र विकास और संपूर्ण उत्थान को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया है। ‘लखपति दीदी’ प्रधानमंत्री जी के इसी संकल्प का फल है।

पेरिस ओलंपिक 2024 में टीम इंडिया की उपलब्धियां भारतीय दल के समग्र बेहतर प्रदर्शन को दर्शाती हैं। 6 पदकों के अलावा, हमारे 8 एथलीट चौथे स्थान पर रहे और वे पोडियम फिनिश से बस थोड़े से अंतर से चूक गए। उनमें से पांच का यह पहला ओलंपिक प्रदर्शन रहा। 15 एथलीट अपनी प्रतिस्पर्धा के क्वार्टर फाइनल में पहुंचे और यह भारत के लिए भी पहली बार ही हुआ।
पेरिस ओलंपिक में एक नए और उत्साही भारत का चेहरा दिखा। 117 सदस्यीय भारतीय दल में 28 खेलो इंडिया एथलीट (केआईए) शामिल थे। भारत के सबसे कम उम्र के ओलंपिक पदक विजेता अमन सेहरावत और पिस्टल शूटर पदक विजेता सरबजोत सिंह सहित 2700 से अधिक एथलीट खेलो इंडिया कार्यक्रम का हिस्सा रहे हैं। ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली मनु भाकर ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2022 में कई पदक जीते हैं और वह 2018 में खेलो इंडिया स्कूल गेम्स के पहले संस्करण का भी हिस्सा थीं।