1 जून से लागू हो रहा भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस मिशन की एक निर्णायक उपलब्धि है, जिसका लक्ष्य नए बाजार खोलने और रोजगार सृजन को गति देने के जरिये भारत के छात्रों, कारीगरों, महिलाओं, किसानों, मछुआरों और एमएसएमई के लिए वैश्विक समृद्धि के मार्ग बनाना है।
भारत और ओमान के बीच गहरे आर्थिक संबंध हैं और लोगों के आपसी संबंध प्रगाढ़ हैं। ओमान में लगभग 7 लाख भारतीय रहते हैं, जिनमें वे व्यापारी परिवार भी शामिल हैं, जिनकी जड़ें 200–300 साल पुरानी हैं। ओमान से भारत को भेजी जाने वाली वार्षिक धनराशि लगभग 2 बिलियन डॉलर है, जबकि देश में 6,000 से अधिक भारतीय उद्यम कार्यरत हैं। दोनों देशों के बीच ...
छत्तीसगढ़ में सुशासन और नागरिक सुविधाओं को केंद्र में रखकर प्रशासनिक व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। इसी दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के नेतृत्व में पंजीयन विभाग में ऐतिहासिक एवं परिवर्तनकारी सुधारों की शुरुआत की गई है। राज्य सरकार का उद्देश्य पंजीयन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी, तकनीक आधारित तथा नागरिकों के लिए पूरी तरह सुविधाजनक बनाना है।
कभी लंबी कतारों, घंटों इंतजार, दस्तावेजों के सत्यापन में देरी और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने वाली पंजीयन प्रक्रिया अब पूरी तरह बदलती दिखाई दे रही है। पहले जहां एक साधारण रजिस्ट्री पूरी करने में 4 से 6 घंटे अथवा कई बार 1 से 2 दिन तक लग जाते थे, वहीं अब आधुनिक डिजिटल व्यवस्थाओं की मदद से यही ...
छत्तीसगढ़ की माटी में इन दिनों विकास और सुशासन की एक नई बयार बह रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य ने प्रगति की एक ऐसी छलांग लगाई है, जो न केवल छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदल रही है, बल्कि इसे देश के नक्शे पर विकसित भारत का एक चमकता हुआ रोल मॉडल भी बना रही है। केंद्र की दूरदर्शी नीतियों और राज्य सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति के मेल से छत्तीसगढ़ में आज डबल इंजन की सरकार धरातल पर साफ महसूस की जा रही है। विकास की इस नई इबारत में समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की खुशहाली सबसे ऊपर है।
गरीब का अपना घर: पहली प्राथमिकता, ठोस कदम
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सत्ता संभालते ही सबसे पहला ...
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिला खेती और बागवानी के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। पारंपरिक खेती के साथ अब किसान नगदी एवं फल फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। सेब, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी और काजू जैसी फसलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रही हैं। इनमें काजू उत्पादन किसानों के लिए आय का मजबूत और भरोसेमंद साधन बनकर उभरा है।
काजू की खेती से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था
जिला प्रशासन, उद्यान विभाग, रीड्स और नाबार्ड के संयुक्त प्रयासों से जिले में काजू उत्पादन का दायरा तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में जिले के लगभग 7800 किसान करीब 7800 एकड़ भूमि ...
बुद्ध के दो मुख्य शिष्यों - अरहंत सारिपुत्त और अरहंत महामोग्गल्लान - के पवित्र अवशेष १ से १० जून तक उलानबटोर के गंदन मठ में प्रदर्शनी के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) के एक विशेष विमान से मंगोलिया ले जाए जाएंगे ।
दो सहस्राब्दियों से अधिक समय से, बौद्ध जगत में अरहंत सारिपुत्त और अरहंत महामोग्गल्लान के नाम अत्यधिक श्रद्धा के केंद्र रहे हैं । गौतम बुद्ध के दो मुख्य शिष्यों के रूप में, वे न केवल बुद्ध के सबसे करीबी आध्यात्मिक साथी थे, बल्कि उनके ज्ञानोदय के बाद धम्म के प्रमुख रक्षक और प्रसारक भी थे ।
बौद्ध परंपरा के अनुसार...
मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार की जरूरत होती है, ठीक उसी प्रकार फसलों के बेहतर विकास और अधिक उत्पादन के लिए संतुलित पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है। पौधे ऑक्सीजन वायुमंडल और पानी से प्राप्त करते हैं, जबकि अन्य आवश्यक पोषक तत्व मिट्टी से लेते हैं। इनमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश प्रमुख पोषक तत्व हैं, जिनकी कमी अधिकांश खेतों की मिट्टी में पाई जाती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया को ही मिट्टी परीक्षण कहा जाता है। मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं में खेत की मिट्टी का वैज्ञानिक विश्लेषण कर फसल की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों की अनुशंसा की जाती है। इससे किसानों को ...
हमारे देश भर में फैले जंगलों, पहाड़ियों और दूरदराज की बस्तियों में, एक शांत लेकिन सफल परिवर्तन चल रहा है। जनजातीय समुदाय लंबे समय से भारत की विकास गाथा के केंद्र में अपने उचित स्थान का इंतजार कर रहे थे। आज वे राष्ट्र की प्रगति के सक्रिय वास्तुकार के रूप में उभर रहे हैं। जनजातीय गरिमा उत्सव की यही भावना है: विकसित भारत की यात्रा का एक राष्ट्रीय उत्सव, जहां प्रगति भूगोल या परिस्थिति का विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का समान रूप से अधिकार है।
महत्वाकांक्षा का पैमाना
यह समझने के लिए कि प्रौद्योगिकी जनजातीय विकास के लिए अपरिहार्य क्यों हो गई है, किसी को पहले चुनौती की व्यापकता को समझना चाहिए। ...
जब मैं तिरुप्पुर के स्कूल में पढ़ता था, तब मेरे मन में देश को लेकर कई सपने थे। मेरे मन में अक्सर ये सवाल उठते थे- भारत अपनी महानता कब वापस पाएगा? विश्व मंच पर एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में कब उभरेगा? हमारे गरीब और वंचित भाई-बहनों को सम्मानजनक जीवन कब मिलेगा? मुझे खुशी है कि किशोरावस्था में मेरे मन में जो विचार थे, वे अब साकार हो रहे हैं।
मैं अक्सर खुद को स्वामी विवेकानंद के इन शब्दों की याद दिलाता था, "उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको।" तमिलनाडु की धरती से स्वामीजी के दिए ये शब्द हर व्यक्ति में देशभक्ति और समर्पण की भावना जगाने की अपार शक्ति रखते हैं। मेरा हमेशा यह विश्वास रहा कि जब भारत अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ेगा, तब वह पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करने वाला राष्ट्र बनकर उभरेगा। पिछले एक दशक में ...
आज जब दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 मना रही है, मानवता एक निर्णायक सभ्यतागत मोड़ पर खड़ी है। वर्तमान में हम अभूतपूर्व तकनीकी और भौतिक प्रगति के युग में जी रहे हैं, फिर भी हम जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों, बढ़ते मानसिक तनाव, पर्यावरणीय क्षरण और जीवन जीने के अस्थिर तरीकों जैसी चुनौतियों का सामना भी कर रहे हैं। इनमें से कई संकटों के मूल में एक ही चुनौती नज़र आती है- वस्तुओं का अनियंत्रित और बिना सोचे-समझे किया जाने वाला उपभोग।
प्राकृतिक संसाधनों के ज़रुरत से ज्यादा दोहन से लेकर डिजिटल उपयोगिता पर अत्यधिक निर्भरता और अस्थिर जीवनशैली तक, आज आधुनिक समाज संतुलन से लगातार दूर होता जा रहा है। और इसी संदर्भ में, योग न केवल एक प्राचीन स्वास्थ्य अभ्यास के रूप में, बल्कि एक ज़िम्मेदार जीवन जीने के ...
भारत और इटली के संबंध अब एक निर्णायक दौर में पहुंच चुके हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में अभूतपूर्व तेजी से विस्तार हुआ है। यह संबंध केवल सौहार्दपूर्ण मित्रता तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अब स्वतंत्रता और लोकतंत्र के मूल्यों तथा भविष्य के साझा दृष्टिकोण पर आधारित एक विशेष रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं। ऐसे समय में, जब पूरी दुनिया की व्यवस्था बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है, इटली और भारत की साझेदारी उच्च राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर लगातार संवाद से आगे बढ़ रही है। यह संबंध अब एक नए और अधिक व्यापक स्तर पर पहुंच रहा है, जिसमें दोनों देशों की आर्थिक ताकत, सामाजिक रचनात्मकता और हजारों वर्षों पुरानी सभ्यतागत विरासत शामिल है।
हमारा सहयोग इस साझा समझ को दर्शाता है कि 21वीं ...
जय सोमनाथ !
वर्ष 2026 की शुरुआत में मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला। यह सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद भी मंदिर के शाश्वत और अविनाशी होने का पर्व था। अब 11 मई को मुझे एक बार फिर सोमनाथ जाने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। इस बार यह यात्रा पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में है। मैं उस क्षण को फिर जीने जा रहा हूं जब भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने मंदिर का लोकार्पण किया था। उस दिन, सोमनाथ में विध्वंस से सृजन तक की यात्रा फिर से जीवंत होगी। छह महीनों के भीतर सोमनाथ के इतिहास से जुड़े इन दो अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी बनना मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है।
सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, ...
सुशासन केवल प्रशासनिक दक्षता का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की संकल्पबद्ध प्रक्रिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ शासन का श्रम विभाग विगत दो वर्षों में इसी सुशासन की भावना को धरातल पर साकार करता हुआ दिखाई देता है। इस अवधि में श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, उनके जीवन को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने तथा उन्हें सामाजिक-आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए अनेक ऐतिहासिक और जनहितकारी कदम उठाए गए हैं।
विष्णु के सुशासन की स्पष्ट झलक श्रम विभाग द्वारा अपनाए गए डिजिटल नवाचारों में दिखाई देती है। प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ाने के उद्देश्य से समस्त
भारत एचआईवी/एड्स के खिलाफ अपनी लड़ाई में एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। पहली घटना की रिपोर्ट होने के चार दशकों बाद, देश ने राष्ट्रीय एचआईवी रोकथाम और उपचार कार्यक्रम का निर्माण किया है, जो दुनिया के सबसे व्यापक और मजबूत उपचार कार्यक्रमों में से एक है। राष्ट्रीय एड्स और एसटीडी नियंत्रण कार्यक्रम (एनएसीपी) ने निर्विवाद उपलब्धियाँ हासिल की हैं। नई संक्रमण दर 2010 की तुलना में लगभग आधी रह गई है, एड्स से संबंधित मृत्यु दर में 80% की कमी दर्ज की गयी है, उपचार पर रहने वाले लोगों में वायरस नियंत्रण अब 97% से अधिक है और भारत ने पूरी तरह से डोल्यूटेग्राविर-आधारित उपचार योजनाओं को अपनाने के साथ बड़ा बदलाव किया है—जिससे यह उपचार प्रभावकारिता में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।
भारत की सामाजिक और राजनीतिक संरचना को आकार देने में जनजातीय समुदायों ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इतिहास साक्षी है कि जनजातीय नेताओं ने अपने भूमि, संस्कृति और गरिमा की रक्षा के लिए, औपनिवेशिक शोषण और अन्याय के विरुद्ध शक्तिशाली आंदोलनों का नेतृत्व किया। अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध से लेकर बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ तक, भारत में विभिन्न जनजातीय समुदायों ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन, स्थानीय जमींदारों और महाजनों के खिलाफ विद्रोह किया, जिन्होंने उनके पारंपरिक जीवन-प्रणाली को बाधित किया था।
भगवान बिरसा मुंडा द्वारा संचालित उलगुलान आंदोलन से लेकर अल्लूरी सीताराम राजू, टंट्या भील, वीर गुंडाधुर, रानी गाइदिनल्यू, रामजी गोंड, शहीद वीर नारायण
पहलगाम में हुआ नरसंहार केवल निर्दोष लोगों के जीवन पर हमला नहीं था- यह भारत की अंतरात्मा पर भी किया गया आक्रमण था। इसके प्रत्युत्तर में भारत ने आतंकवाद-रोधी कार्रवाई की नियम पुस्तिका के पुनर्लेखन का निर्णय लिया। ऑपरेशन सिंदूर राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों की रक्षा के लिए मोदी सरकार की न बर्दाश्त करने और कोई समझौता नहीं करने की नीति यानी मोदी सिद्धांत की सबसे स्पष्ट अभिव्यक्ति है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने टेलीविजन पर राष्ट्र के नाम संबोधन में आतंकवाद से निपटने के लिए अपने इस सिद्धांत की रूपरेखा प्रस्तुत की। हाल की घटनाओं के आधार पर निर्मित यह सिद्धांत आतंकवाद और बाहरी खतरों पर भारत की प्रतिक्रिया के लिए निर्णायक तौर-तरीके निर्धारित करता है।
भारत का सहकारिता आंदोलन सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में गहराई से निहित है। यह आंदोलन समावेशी विकास, सामुदायिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के लिए एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में विकसित हुआ है। सहकारिता मंत्रालय की स्थापना और इसकी नवीनतम पहलों के माध्यम से सरकार ने एक सहकारिता-संचालित मॉडल को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है, जो देश के हर कोने तक पहुंचेगा और समाज की मुख्यधारा से अलग पड़े समुदायों के लिए स्थायी आजीविका और वित्तीय समावेशन की सुविधा प्रदान करेगा। दिनांक 6 जुलाई 2021 को सहकारिता मंत्रालय की स्थापना भारत के सहकारी आंदोलन में एक
वक्फ संपत्तियां समुदाय के कल्याण के लिए होती हैं और यह कल्याण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा या धार्मिक उद्देश्यों से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, जमीन हड़पने, फर्जी दावों और राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्तियों द्वारा दुरुपयोग के मामलों ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। गरीबों की मदद करने के बजाय, इन संपत्तियों का इस्तेमाल अक्सर निजी लाभ के लिए किया जाता रहा है। यह नया विधेयक सुनिश्चित करता है कि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा की जाए और उनका इस्तेमाल इच्छा के मुताबिक किया जाए।
वक्फ संशोधन विधेयक 2024, वक्फ संपत्तियों में कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और अतिक्रमण के लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों का समाधान करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण विधायी कदम है। ये प्रस्तावित संशोधन
प्रामाणिक कहानियों और रचनात्मक मनोरंजन की भूखी दुनिया में, भारत वैश्विक मीडिया परिदृश्य में क्रांति लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। विश्व दृश्य-श्रव्य एवं मनोरंजन शिखर सम्मेलन (वेव्स) महज मीडिया और मनोरंजन से जुड़ा एक हितधारक भर नहीं है - यह एक ऐसे परिवर्तनकारी दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है जो दुनिया भर में रचनाकारों, नीति-निर्माताओं और दर्शकों के कंटेंट के साथ जुड़ने के तौर-तरीके को नए सिरे से परिभाषित करेगा। आगामी 1-4 मई, 2025 को मुंबई में आयोजित होने वाला वेव्स, संभवतः सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा रचनाकारों के इकोसिस्टम के लिए शुरू की गई एक ऐसी बेहद दूरदर्शी पहल के रूप में उभर कर सामने
ट्रम्प प्रशासन अपने दूसरे कार्यकाल में टैरिफ और ‘अमेरिका को फिर से महान बनाने’ की नीतियों पर दोगुना जोर दे रहा है। ट्रम्प प्रशासन अतीत के गठबंधनों को फिर से परिभाषित और पुनर्लेखन करने का काम भी कर रहा हैजिसकी गूंज यूरोप और एशिया में उनके सहयोगियों द्वारा महसूस की जा रही है। इन कदमों का उद्देश्य व्यापार संतुलन में सुधार और सार्वजनिक व्यय को कम करके अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। अमेरिका ने पेरिस समझौते वविश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से खुद को अलग कर लिया है। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) से भी वह पहले ही अलग हो चुका है। ये कदम वैश्विक भू-राजनीतिक व्यवस्था में एक शून्य पैदा कर रहे हैं। यह शून्य लंबे समय तक नहीं रहेगा-इसे प्रतिस्पर्धी शक्तियों द्वारा भरा जाएगा। अमेरिका सबसे शक्तिशाली बना हुआ है औरहम एक बार फिर एक बहुध्रुवीय दुनिया का उदय देख रहे हैं। विखंडित वैश्वीकरण, तकनीकी वर्चस्व की लड़ाई, ऊर्जा की भू-राजनीति और ढहता वैश्विक शासन विश्व को नया आकार देने वाले प्रमुख भू-राजनीतिक रुझान हैं जिनसे भारत को निपटना होगा।
पिछले दशक में भारत की विकास गाथा में एक उल्लेखनीय बदलाव आया है और इस यात्रा का सबसे उत्साहवर्धक पहलू यह है कि इस देश की विकास गाथा में महिलाओं की भूमिका में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आज हम गर्व से यह कह सकते हैं कि भारत के विकास के एजेंडे के केन्द्र में ‘नारी शक्ति’ है। भारत महिलाओं को न केवल जमीनी स्तर पर सशक्त बना रहा है, बल्कि विकसित भारत के निर्माता के रूप में उनके नेतृत्व का मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है। महिलाओं को विकास के लाभार्थी के रूप में देखने से लेकर उन्हें परिवर्तन के वाहक के तौर पर पहचानने की दिशा में आया बदलाव, सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं पहलों द्वारा समर्थित है। जीवन की निरंतरता से संबंधित दृष्टिकोण के तहत तैयार की गई ये नीतियां महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और यह सुनिश्चित कर रही हैं कि उन्हें बचपन से लेकर शिक्षा, सम्मानजनक जीवन, मातृत्व, वित्तीय आजादी एवं आर्थिक एकीकरण के मामले में सहायता हासिल हो।
‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’
आज के इस तेज गति वाली 21वीं सदी में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में नित नई संभावनाएँ उभर रही हैं, विशेष रूप से आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी तकनीकों के माध्यम से। एआई न केवल महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजगार के नए अवसर प्रदान कर सकता है, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी समान भागीदार बनाने में मदद कर सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने G20 समिट से लेकर वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम तक, हर मंच पर ‘वूमेन-लेड डेवलपमेंट’ को बढ़ावा देने की बात कही है। इसके तहत महिलाओं को केवल विकास का लाभार्थी ही नहीं बल्कि नेतृत्वकर्ता भी माना जा रहा है। एआई इस दृष्टि से कई प्रकार से देश की विकास यात्रा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ा सकता है। चाहे रोजगार के नए अवसरों का सृजन करना हो या शिक्षा एवं कौशल विकास और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को सुगम बनाना, एआई हर क्षेत्र में अहम भूमिका निभा सकता है।
महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने में भी एआई महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। घरेलू हिंसा और उत्पीड़न की निगरानी के लिए एआई आधारित डेटा एनालिटिक्स और मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किए जा सकते हैं, जो महिलाओं के खिलाफ अपराधों को चिन्हित करने और उनके रोकथाम में मदद करेंगे। इसके अलावा, एआई-पावर्ड चैटबॉट्स कानूनी और सुरक्षा संबंधी सलाह देने में मददगार हो सकते हैं, जिससे महिलाएं किसी भी परिस्थिति में त्वरित सहायता प्राप्त कर सकें।
महाराष्ट्र के बारामती में एक छोटा किसान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के साथ कृषि के नियमों को फिर से निर्धारित करने में जुटा है। यह बात अपने-आप में अद्वितीय है। हम उर्वरक के इस्तेमाल में कमी, जल संसाधन के बेहतर इस्तेमाल से अधिक उपज के बारे में बात करते हैं, जो एआई समर्थित है। यह भारत की एआई-संचालित क्रांति की एक झलक मात्र है। तकनीक और नवाचार अब प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन को बखूबी बदल रहे हैं। कई अर्थों में इस किसान की कहानी एक बहुत बड़े परिवर्तन का सूक्ष्म रूप है। यह सूक्ष्म रूप 2047 तक विकसित भारत की ओर हमारे प्रस्थान का है।
डिजिटल नियति का निर्धारण
भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई), एआई, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पर जोर देकर अपने डिजिटल भविष्य को आकार दे रहा है। दशकों से, भारत सॉफ़्टवेयर के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी रहा है, किंतु अब यह हार्डवेयर विनिर्माण में भी बड़ी प्रगति कर रहा है। पांच सेमीकंडक्टर संयंत्र निर्माणाधीन हैं, जो वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारत की भूमिका को मजबूत करते हैं। आज इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद हमारे शीर्ष तीन निर्यातों में शुमार हैं और जल्द ही हम एक प्रमुख मील के पत्थर यानी इस साल भारत की पहली “मेक इन इंडिया” चिप के लॉन्च तक पहुंच जाएंगे।
राजू (बदला हुआ नाम), आयु 18 वर्ष, को सामान्य रूप से चलते हुए भी सांस लेने में तकलीफ होती थी और वह थकान महसूस करता था। साल 2017 में उसे सीने में दर्द के कारण दिल की गंभीर बिमारी से पीडि़त होने के बारे में पता चला। इलाज की अंतहीन जद्दोजहद में उसके पिता ने परिवार के मवेशी और जमीन तक बेच डाली और पांच लाख रुपये से अधिक रकम के कर्ज में डूब गए। साल 2019 में, उन्हें आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएमजेएवाई) की ओर से एक पत्र मिला,लेकिन उन्होंने इसको ज्यादा अहमियत नहीं दी। साल 2022 में, राजू की हालत बिगड़ गई, जिसके लिए फौरन सर्जरी करने की आवश्यकता थी। वे हताश और बेबस हो चुके थे। तभी अस्पताल के एक कर्मचारी ने उनके परिवार को पीएमजेएवाई के बारे में पता करने की सलाह दी और उनकी पात्रता की पुष्टि की। इसकी बदौलत राजू की लगभग 1.83 लाख रुपये की लागत वाली जीवन रक्षक सर्जरी संभव हो सकी । आखिरकार, 67 दिन बाद उसे नए सिरे से जिंदगी शुरु करने के लिए अस्पताल से छुट्टी दे मिल गई।
भारतीय कपड़ा उद्योग हमेशा से देश की अर्थव्यवस्था, परंपरा, संस्कृति और विरासत की आधारशिला रहा है। यह कृषि के बाद सबसे ज़्यादा रोज़गार सृजन करने वाले क्षेत्रों में से एक है और भारत के सकल घरेलू उत्पाद और निर्यात में इसका महत्वपूर्ण योगदान है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में विशेष तौर पर वैश्विक बाज़ार में, कई कारणों से इसने अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं किया। खासतौर पर भारतीय परिधान उद्योग, जो कपड़ा मूल्य श्रृंखला का सबसे महत्वपूर्ण घटक है, ने अनुभव किया कि वह महत्वपूर्ण बाज़ारों में टैरिफ़ लाभ लेने वाले कुछ कम विकसित और अल्प-विकसित देशों के समक्ष लागत प्रतिस्पर्धा की दौड़ में पिछड़ गया और इस तरह अपनी वास्तविक क्षमता के अनुरूप प्रगति नहीं कर पाया।
इस बात को ध्यावन में रखते हुए वैश्विक आयात पैटर्न के साथ उत्पाद की पेशकश को फिर से जोड़ने के लिए संपूर्ण पुनर्गठन और शीघ्र क्षमता वृद्धि की आवश्य कता थी। सरकार की पीएलआई और पीएममित्र पहलों द्वारा इसका काफी हद तक समाधान निकाला गया। आत्मविश्वास से परिपूर्ण उभरता भारत अपनी पूरी क्षमताके साथ आगे बढ़ने और पूरी ताकत झोंकने के लिए तैयार था। इसी दृष्टिकोण ने 2024 में भारत टेक्स के विचार को जन्म दिया।
- ‘विकसित भारत हेतु पर्यटन: हमारे प्रथम ‘अतुल्य भारतीय’ का विज़न’ - श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत
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- खेलो इंडिया: प्रतिभाओं की पहचान कर भारत के ओलंपिक सपनों को पूरा करना - डॉ. मनसुख मांडविया