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एआई इम्पैक्ट समिट, एआई का उपयोग करने की दिशा में विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ - प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली 2026-02-22

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इंडिया एआई इम्पैक्ट सम्मेलन  सम्मेलन भविष्य में विश्व स्तर पर एआई की शक्ति के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ है।

आकाशवाणी से मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने बताया कि इस सम्मेलन के लिए नई दिल्ली के भारत मंडपम में कई देशों के नेता, उद्योगपति, नवप्रवर्तक और स्टार्टअप क्षेत्र से जुड़े लोग एकत्र हुए। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्व नेताओं और तकनीकी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से मिलने का अवसर मिला।

श्री मोदी ने कहा कि उन्होंने इंडिया एआई प्रदर्शनी में विश्व नेताओं को कई वस्तुएं दिखाईं। उन्होंने बताया कि विशेष रूप से प्रदर्शनी के दौरान अमूल बूथ और सुश्रुत संहिता ने विश्व नेताओं को बहुत प्रभावित किया। इसमें बताया गया कि एआई किस प्रकार पशुओं के उपचार में सहायता कर रहा है और किसान चौबीसों घण्टे और सातों दिन एआई की मदद से अपने डेयरी फार्म और पशुओं पर कैसे नजर रख रहे हैं।

श्री मोदी ने कहा विश्व भर के नेता यह देखकर आश्चर्यचकित हुए कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी यांत्रिक मेधा की सहायता से प्राचीन ग्रंथों, ज्ञान और पांडुलिपियों का संरक्षण कर रहा है। उन्होंने विस्तार से बताया कि प्रदर्शनी के दौरान सुश्रुत संहिता को प्रदर्शित करने के लिए चुना गया था।

पहले चरण में, यह दिखाया गया कि भारत प्रौद्योगिकी की सहायता से पांडुलिपियों की छवि की गुणवत्ता में सुधार कर उन्हें पठनीय बना रहा है। दूसरे चरण में, इस छवि को मशीन से पठन योग्य बनाया गया। अगले चरण में, मशीन से पठनीय पाठ को एक एआई अवतार द्वारा पढ़ा गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतिम चरण में, यह प्रदर्शित किया गया कि इस अमूल्य भारतीय ज्ञान का भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विश्व के नेताओं ने आधुनिक अवतार के माध्यम से भारत के प्राचीन ज्ञान के बारे में जानने में गहरी रुचि दिखाई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि शिखर सम्मेलन में विश्व को एआई के क्षेत्र में भारत की अद्भुत क्षमताओं को देखने का अवसर मिला। इस दौरान, भारत ने तीन मेड इन इंडिया एआई मॉडल भी शुरू किए। श्री मोदी ने शिखर सम्मेलन को अब तक का सबसे बड़ा एआई शिखर सम्मेलन बताया। उन्होंने इस शिखर सम्मेलन की सफलता के लिए सभी नागरिकों को बधाई दी।

वर्तमान टी-20 क्रिकेट विश्व कप के बारे में श्री मोदी ने कहा कि इस चैंपियनशिप में भारतीय मूल के कई खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि कनाडा की टीम में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की संख्या सर्वाधिक है।

टीम के कप्तान दिलप्रीत बाजवा का जन्म पंजाब के गुरदासपुर में हुआ था। नवनीत धालीवाल चंडीगढ़ से हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सूची में हर्ष ठाकर और श्रेयस मोवा जैसे कई नाम शामिल हैं, जो कनाडा के साथ भारत का भी गौरव बढ़ा रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि अमरीकी टीम में कई भारतीय मूल के खिलाड़ी हैं।

अमरीकी टीम के कप्तान मोनांक पटेल गुजरात की अंडर-16 और अंडर-18 टीमों के लिए खेल चुके हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुंबई के सौरभ, दिल्ली के हरमीत सिंह और मिलिंद कुमार अमरीकी टीम का गौरव हैं। उन्होंने कहा कि ओमान की टीम के कई खिलाड़ी भारत के विभिन्न राज्यों के लिए खेल चुके हैं।

श्री मोदी ने कहा कि जतिंदर सिंह, विनायक शुक्ला, करण, जय और आशीष ओमान क्रिकेट को जोड़ने वाली मजबूत कड़ियाँ हैं। भारतीय मूल के खिलाड़ी न्यूजीलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और इटली की टीमों में भी अपनी जगह पक्की कर रहे हैं।

श्री मोदी ने कहा कि भारतीय मूल के ऐसे अनगिनत खिलाड़ी हैं जो अपने-अपने देशों का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जहां भी जाते हैं, अपनी मातृभूमि से जुड़े रहकर उस देश के विकास में योगदान देते हैं।

प्रधानमंत्री ने केरल की एक छोटी बच्ची, आलिन शेरिन अब्राहम के बारे में बात की। आलिन ने केवल दस महीने की उम्र में अपनी जान गंवा दी। उन्होंने आलिन के पिता अरुण अब्राहम और माता शेरिन के आलिन के अंगदान करने के फैसले की प्रशंसा की।

श्री मोदी ने कहा कि यह एक फैसला उनकी दूरदृष्टि और व्यक्तित्व की महानता दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आजकल भारत में अंगदान के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इससे जरूरतमंदों को सहायता मिल रही है और देश में चिकित्सा अनुसंधान को भी मजबूती मिल रही है।

प्रधानमंत्री ने दिल्ली की लक्ष्मी देवी का उदाहरण भी दिया। उन्होंने पिछले वर्ष केदारनाथ की यात्रा की थी। हृदय प्रत्यारोपण के बाद उन्होंने 14 किलोमीटर की पैदल यात्रा की।

श्री मोदी ने बताया कि जब लक्ष्मी देवी को एक मृत दाता का हृदय मिला, तब उनका हृदय केवल 15 प्रतिशत ही काम कर रहा था। उन्होंने पश्चिम बंगाल के गौरांग बनर्जी का भी उदाहरण दिया, जो दो बार नाथू ला जा चुके हैं।

उन्होंने फेफड़े के प्रत्यारोपण के बाद यह उपलब्धि हासिल की। श्री मोदी ने किडनी प्रत्यारोपण के बाद खेल गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राजस्थान के सीकर के रामदेव सिंह का जिक्र किया।

 प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक नेक काम अनगिनत लोगों का जीवन बदल सकता है। उन्होंने ऐसे नेक काम करने वाले सभी लोगों की प्रशंसा की।

राष्ट्रपति भवन में कल राजगोपालाचारी उत्सव मनाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस अवसर पर राष्ट्रपति भवन के केंद्रीय प्रांगण में सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। सी. राजगोपालाचारी स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरल थे।

श्री मोदी ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि वे उन लोगों में से थे जिन्होंने सत्ता को पद नहीं बल्कि सेवा के रूप में देखा। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि स्वतंत्रता के बाद भी ब्रिटिश प्रशासकों की प्रतिमाएं राष्ट्रपति भवन में रहने दी गईं और भारत के महानतम सपूतों को स्थान नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की भी प्रतिमा थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब इस प्रतिमा के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

राजगोपालाचारी उत्सव के दौरान 24 फरवरी से पहली मार्च तक सी. राजगोपालाचारी पर एक प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। उन्होंने देशवासियों से इस प्रदर्शनी का अवलोकन करने का भी आग्र किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल अरेस्ट के बारे में कहा कि ‘मन की बात’ में डिजिटल अरेस्ट और डिजिटल धोखाधड़ी पर उनके भाषण के बाद समाज में इस दिशा में काफी जागरूकता आई है।

उन्होंने ऐसी घटनाएं अब भी होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ये घटनाएं अक्षम्य हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट और वित्तीय धोखाधड़ी से निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने श्रोताओं को आगाह किया कि अपराधी फर्जी कॉल करते हैं, एसएमएस और लिंक भेजते हैं। श्री मोदी ने सभी से सतर्क रहने और ऐसे धोखेबाजों के झांसे में न आने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि केवाईसी या री-केवाईसी केवल बैंक शाखा, आधिकारिक ऐप और अधिकृत माध्यम से ही कराई जानी चाहिए। श्री मोदी ने लोगों से ओटीपी, आधार नंबर या बैंक खाते की जानकारी किसी के साथ साझा न करने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से समय-समय पर अपना पासवर्ड बदलते रहने का भी आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने हाल ही में इन्हीं विषयों पर वित्तीय साक्षरता सप्ताह का आयोजन किया था। यह वित्तीय साक्षरता अभियान पूरे वर्ष जारी रहेगा। श्री मोदी ने लोगों से भारतीय रिज़र्व बैंक के संदेश पर ध्यान देने और अपने केवाईसी पंजीकरण को अपडेट रखने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में किसान अब न केवल उत्पादन पर बल्कि गुणवत्ता, मूल्यवर्धन और नए बाजारों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

उन्होंने ओडिशा के हिरोद पटेल का उदाहरण दिया, जिन्होंने खेती को एक नए दृष्टिकोण से देखना शुरू किया। इस युवा किसान ने अपने खेत के तालाब के ऊपर एक मजबूत जालीदार ढांचा बनाया और उस पर लता वाली सब्जियां उगाईं।

उन्होंने तालाब के चारों ओर केले, अमरूद और नारियल के पेड़ लगाए और तालाब में मछली पालन भी शुरू किया। श्री मोदी ने कहा कि इससे भूमि का बेहतर उपयोग, जल की बचत और अतिरिक्त आय हुई है। आज दूर-दूर से किसान उनके इस मॉडल को देखने आते हैं।

प्रधानमंत्री ने केरल के त्रिशूर जिले के एक गांव के बारे में बताया, जहां एक ही खेत में चावल की 570 किस्में उगाई जाती हैं। श्री मोदी ने इसे बीज विरासत को संरक्षित करने का एक व्यापक अभियान बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय किसानों की मेहनत का फल आंकड़ों में भी झलकता है।

श्री मोदी ने कहा कि आज भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 15 करोड़ टन से अधिक चावल का उत्पादन कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ वैश्विक खाद्य भंडार में भी योगदान दे रहा है।

श्री मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कि कृषि उत्पाद अब हवाई मार्ग से विदेशों तक अधिक आसानी से पहुँच रहे हैं। कर्नाटक के नंजनगुड केले, मैसूर के पान के पत्ते और भारत के नींबू मॉलदीव को निर्यात किए जा रहे हैं।

ये उत्पाद अपने स्वाद और गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं और इन्हें जीआई टैग भी प्राप्त है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का किसान गुणवत्ता को प्राथमिकता देता है, मात्रा भी बढ़ा रहा है और अपनी पहचान भी बना रहा है।

प्रधानमंत्री ने केरल के तिरुनावया में भरतप्पुझा नदी के किनारे मनाए जाने वाले सदियों पुराने मामंगम परंपरा के बारे में भी बात की। कई लोग इसे महा माघ महोत्सव या केरल कुंभ भी कहते हैं।

श्री मोदी ने कहा कि माघ माह में पवित्र नदी में स्नान करना और उस क्षण को जीवन भर के लिए अविस्मरणीय बनाना ही इस महोत्सव का सार है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन लगभग ढाई सौ वर्षों से उसी भव्यता के साथ नहीं मनाया गया है जैसा पहले मनाया जाता था।

प्रधानमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस बार केरल कुंभ बिना किसी बड़ी घटना के सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। श्री मोदी ने कहा कि महाकुंभ और केरल कुंभ केवल स्नान के त्यौहार नहीं हैं। उन्होंने इन्हें स्मृति का जागरण और संस्कृति का पुनःस्मरण बताया। उन्होंने कहा कि नदियाँ भले ही अलग हों, लेकिन आस्था की धारा एक ही है और यही भारत है।

प्रधानमंत्री ने 24 फरवरी को पूर्व तमिलनाडु मुख्यमंत्री जयललिता की जयंती से पहले उन्हें याद किया। उन्होंने कहा कि राज्य की अपनी यात्राओं के दौरान आज भी उन्हें तमिलनाडु के लोगों का उनके प्रति गहरा स्नेह है।

उन्होंने कहा कि जयललिता का नाम सुनते ही तमिलनाडु के लोगों के चेहरे पर एक अलग ही चमक आ जाती है। उन्होंने बताया कि जयललिता ने माताओं, बहनों और बेटियों के कल्याण के लिए कई सराहनीय प्रयास किए। श्री मोदी ने कहा कि जयललिता ने राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ठोस कदम भी उठाए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जयललिता ने 2002 और 2012 में गुजरात में उनके दो शपथ ग्रहण समारोहों में भी भाग लिया था। उन्होंने यह भी बताया कि पोंगल के अवसर पर जयललिता ने उन्हें चेन्नई में दोपहर के भोजन पर आमंत्रित किया था और यह स्नेहपूर्ण भाव उनके लिए अविस्मरणीय है।

परीक्षा के प्रति सजग विद्यार्थियों के विषय पर प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि विद्यार्थी पूरी लगन से अपनी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और तनाव में नहीं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि उनका मूल्य उनकी मार्कशीट से निर्धारित नहीं होता।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यार्थी अपनी परीक्षाओं में सफल होंगे और अपने जीवन में सफलता की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे। श्री मोदी ने सभी को रमज़ान के पवित्र महीने की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आगामी होली के त्यौहार की भी शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि लोग अपने परिवार और प्रियजनों के साथ सभी त्यौहारों को प्रसन्नता से मनाएंगे। श्री मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी देश को आत्मनिर्भर बनाने के अभियान में सहायक है।