नई दिल्ली 2026-07-13
सर्वोच्च न्यायालय ने असम के विदेशी न्यायाधिकरणों द्वारा “विदेशी” घोषित किए गए 27 लोगों द्वारा दायर याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया कि नागरिकता निर्धारण या किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने की प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि उचित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने 27 मामलों में गुवाहाटी उच्च न्यायालय और विदेशी न्यायाधिकरणों के आदेशों को रद्द कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि नागरिकता तय करने या किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने की प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए और न्यायिक सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने निर्देश दिया कि न्यायाधिकरणों द्वारा उनके मामलों की पुन: सुनवाई होने तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। याचिकाकर्ताओं में सबित्री डे, अजबहार अली, मोहम्मद अकबर अली, अबेदा खातून और अनवारा खातून शामिल थे। इनका तर्क था कि उन्हें अति तकनीकी आधारों और मामूली विसंगतियों के आधार पर विदेशी घोषित किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय और बाद में सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधिकरण के आदेशों को चुनौती दी थी। अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए 1971 से पहले के अभिलेखों, मतदाता सूचियों और भूमि अभिलेखों जैसे दस्तावेजों का सहारा लिया था।