13 जनवरी 2000 से प्रकाशित
प्रातः कालीन समाचार पत्र, कोरबा

अपराधों से प्रयाश्चित, निराशा से संकल्प तक, जेल में न्यायाधीशों ने बताये जीवन बदलने के मंत्र

कोरबा 2026-10-02

महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा द्वारा जिला जेल कोरबा में न्यायाधीशों की उपस्थिति में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती गरिमा शर्मा, तृतीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री सुनील कुमार नंदे एवं जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश एफ. टी. सी सुश्री सीमा प्रताप चन्द्रा की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजित हुआ । प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती गरिमा शर्मा, ने अपने उद्बोधन में जेल में निरूद्ध बंदियों को संबोधित करते हुए बताया कि जेल में रहने के दौरान या जेल से बाहर जाने के पश्चात आपके मन को धैर्य विवेक संग सही ढंग से नियंत्रण में रखना आवश्यक है । 

महात्मा गांधी के जीवन से यह सीखने योग्य है कि गलतियां करना मनुष्य का स्वाभाव है परंतु उससे सीख लेना बहुत ही आवश्यक है क्योकि आपका परिवार बहुत ही आशा के साथ आपका इंतजार करता है तथा आप अपने सकारात्मक विचारों एवं संकल्प के साथ जीवन की नई शुरूवात करते हैं। आज का यह दिवस एक संकल्प की ओर इंगित करता है। संकल्प यह है कि जो गलती हो गई है उसे सुधार कर सही दिशा में सकारात्मक कार्य की ओर अग्रसर होना है।

तृतीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री सुनील कुमार नंदे ने अपने प्रेरक उदबोधन में निरूद्ध बंदियों को आचरण व व्यवहार में सुधार करने हुए प्रेरित करते हुए कहा कि जिससे वे समाज में पुनः सशक्त व आत्मनिर्भर बन सके तथा आगे के जीवन को अच्छा बनाने के संबंध सोच कर रखिये। मान लिजिए यहां पर हम अपनी गलती से आये है और प्रायश्चित करने के तुरंत बाद जब हम बाहर जायेंगें तो समाज हमको उसी रूप में स्वीकार कर लेगा । जैसे हम पहले थे । यहां रहते हुए ये मत सोचिए कि आज हम जिस अपराध में आए है आगे उससे बड़ा अपराध करके आएगें। अपराध का यही त्याग कीजिए। गलती का प्रायश्चित किजिए और आगे बढ़िये।

कु. डिंपल सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिरण कोरबा ने गांधी जी को सादगी त्याग व कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक बताते हुए कहा सत्य व अहिंसा के मार्ग में चल कर देश को स्वतंत्रता दिलानें में उन्होने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सहायक जेल अधीक्षक जिला जेल कोरबा श्री अमितेश साहू ने बंदियों को अपराध न करने का संकल्प दिलाते हुए मुख्य धारा से जोड़ने हेतु प्रेरित किया। इसके साथ कुछ शिक्षित कैदियों ने प्राचीन काल की जेल यातनाओं मे हुए कमित सुधार न्यायालय के न्यायाधीशों के प्रेरणाओं से अपराध मुक्त जीवन जीने पर सह कैदियों को जोर दिया ।

इस अवसर पर श्रीमती सोनी तिवारी प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी के न्यायालय के प्रथम अतिरिक्त न्यायाधीश, कु. कुमुदिनी गर्ग प्रथम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी, कु. ग्रेसी न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कु. त्रिप्ति अग्रवाल द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी, कु. प्रिया सोमावर प्रथम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी के न्यायालय के द्वितीय अतिरिक्त व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी कोरबा, सहायक जेल अधीक्षक अमितेश साहू, श्री विक्रम सिह राठौर असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस कॉसिल कोरबा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारीगण, श्री रमाकांत दुबे पैरालीगल वॉलिटियर व जेल के कर्मचारीगण उपस्थित रहे ।