13 जनवरी 2000 से प्रकाशित
प्रातः कालीन समाचार पत्र, कोरबा

आईआईटी भिलाई ने विकसित की जंग-रोधी और अग्नि-सुरक्षा देने वाली स्मार्ट बहु-कार्यात्मक कोटिंग

आईआईटी भिलाई-आईआईटी पटना के शोधकर्ताओं की बड़ी उपलब्धि

रायपुर 2026-07-09

धातुओं में जंग लगने और आग से होने वाली क्षति से उद्योगों को होने वाले भारी आर्थिक नुकसान, सुरक्षा संबंधी जोखिम तथा रखरखाव लागत की चुनौती का समाधान खोजते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई (आईआईटी भिलाई) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना (आईआईटी पटना) के शोधकर्ताओं ने एक स्मार्ट बहु-कार्यात्मक पॉलिमर कोटिंग विकसित की है। यह नई कोटिंग धातु की सतहों को जंग से सुरक्षित रखने के साथ-साथ अग्नि-सुरक्षा भी प्रदान करती है। शोध के परिणाम विश्व की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स (Advanced Functional Materials) में प्रकाशित हुए हैं।

यह शोध आईआईटी भिलाई के रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर संजीब बनर्जी के नेतृत्व में किया गया। शोध दल में निशिकांत सिंह, स्वरूप मैती, सौमेन घोष, सुब्रत चट्टोपाध्याय तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना के वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

 शोधकर्ताओं के अनुसार वर्तमान में उपयोग में आने वाली अधिकांश सुरक्षात्मक कोटिंग्स केवल एक ही उद्देश्य की पूर्ति करती हैं, जिसके कारण व्यापक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई परतों अथवा अतिरिक्त रासायनिक उपचारों की आवश्यकता पड़ती है। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए शोध दल ने फॉस्फोरस और फ्लोरीन आधारित एक विशेष पॉलिमर कोटिंग विकसित की है, जिसमें एक ही सामग्री में अनेक महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक गुण समाहित किए गए हैं।

 यह स्मार्ट कोटिंग विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को अनुकूलित करने में सक्षम है। यह धातु की सतहों पर जंग और क्षरण को प्रभावी ढंग से रोकती है, सतह पर मजबूत पकड़ बनाए रखती है तथा आग लगने की स्थिति में लौ के प्रसार को धीमा कर सुरक्षा बढ़ाती है। व्यापक परीक्षणों में यह कोटिंग खारे पानी, बाहरी वातावरण तथा कठोर मौसमीय परिस्थितियों में भी प्रभावी सिद्ध हुई है।

 प्रोफेसर संजीब बनर्जी ने कहा कि उद्योगों को जंग-रोधी क्षमता, टिकाऊपन और अग्नि-सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रायः अनेक प्रकार की कोटिंग्स अथवा उपचार अपनाने पड़ते हैं। यह शोध दर्शाता है कि इन सभी महत्वपूर्ण गुणों को एक ही कोटिंग सामग्री में समाहित किया जा सकता है, जिससे उद्योगों को अधिक सरल, प्रभावी और किफायती समाधान उपलब्ध होगा।

 शोधकर्ताओं का कहना है कि यह नई तकनीक धातु आधारित अवसंरचना, परिवहन प्रणालियों, औद्योगिक संयंत्रों, समुद्री संरचनाओं, ऊर्जा उपकरणों तथा अन्य महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की आयु बढ़ाने के साथ-साथ रखरखाव लागत में उल्लेखनीय कमी ला सकती है। मजबूत आसंजन क्षमता के कारण कोटिंग के उखड़ने की संभावना भी कम हो जाती है, जिससे इसकी दीर्घकालिक विश्वसनीयता बढ़ती है।

 शोध दल के अनुसार एक ही सामग्री में अनेक सुरक्षात्मक गुणों का समावेश होने के कारण यह तकनीक आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान तथा राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन जैसी पहलों के अनुरूप टिकाऊ अवसंरचना, औद्योगिक सुरक्षा और सतत विनिर्माण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह उपलब्धि उन्नत सामग्री विज्ञान तथा औद्योगिक नवाचार के क्षेत्र में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई के बढ़ते वैश्विक योगदान को भी रेखांकित करती है।