13 जनवरी 2000 से प्रकाशित
प्रातः कालीन समाचार पत्र, कोरबा

अनैतिक फार्मा मार्केटिंग प्रथाओं पर अंकुश लगाने सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र को समिति गठित करने दिया निर्देश

नई दिल्ली 2026-10-08

सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने डॉक्‍टरों को दिए जाने वाले उपहारों और अन्‍य फायदों सहित फॉर्मास्‍युटिकल कंपनियों की विपणन पद्धतियों के वैधानिक नियमन की आवश्‍यकता की जांच के लिए केंद्र सरकार को तीन सदस्‍यीय समिति गठित करने का निर्देश दिया। न्‍यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने यह निर्देश उस याचिका की सुनावई के दौरान दिए जिसमें दवा कंपनियों और डॉक्‍टरों के बीच अनैतिक व्‍यवहारों के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की गई थी।

प्रस्‍तावित समिति संबंधित पक्षों की राय और सुझाव पर विचार करेगी। साथ ही यह देखेगी कि क्‍या दवा कंपनिययों की विपणन पद्धतियों को नियंत्रित करने के लिए किसी वैधानिक ढांचे की जरूरत है या नहीं और यदि है तो उसकी संरचना कैसी होनी चाहिए। केंद्र सरकार से इस संबंध में हलफनामा दायर करने को कहा गया है। मुकदमे की अगली सुनवाई अगले साल 29 जनवरी को होगी।

न्‍यायालय ने मौजूदा संरचना पर चिंता जाहिर की है। वर्तमान व्यवस्था में डॉक्टरों द्वारा ऐसे लाभ स्वीकार करने पर कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन डॉक्टरों को ये लाभ या प्रोत्साहन देने वाली फार्मास्यूटिकल कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए कोई वैधानिक व्यवस्था नहीं है। यह मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब शीर्ष न्‍यायालय दवाओं की कीमत और उनकी किफायती उपलब्धता से जुड़े एक अलग मामले की भी जांच कर रहा है। इसमें एक कैंसर की दवा के खुदरा मूल्य और एमआरपी के बीच करीब 10 गुना अंतर होने की बात सामने आई है।