13 जनवरी 2000 से प्रकाशित
प्रातः कालीन समाचार पत्र, कोरबा

गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य : सर्वोच्च न्यायालय

नई दिल्ली 2026-11-06

सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने कहा है कि किसी गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की संवैधानिक समय-सीमा उसकी वास्तविक हिरासत शुरू होने के समय से गिनी जाएगी न कि पुलिस द्वारा गिरफ्तारी दर्ज किए जाने के समय से।

न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22 (2) के तहत निर्धारित 24 घंटे की अवधि की गणना व्यक्ति को वास्तविक रूप से हिरासत में लिए जाने के समय से होगी। पुलिस की ओर से गिरफ्तारी की औपचारिक कार्रवाई पूरी करने के समय से इसकी गणना नहीं की जा सकती। इस अवधि से अधिक समय तक मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना हिरासत में रखना भी प्रतिबंधित है।

न्यायमूर्ति भुइयां की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि तलाशी और जब्ती की कार्रवाई पूरी होने तथा गिरफ्तारी औपचारिक रूप से दर्ज होने के समय से 24 घंटे की अवधि की गणना करना कानूनन उचित नहीं है और पूरी तरह असंवैधानिक है। सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक समय तक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए बिना हिरासत में रखा जाता है तो उसे तत्काल रिहा करना होगा।

शीर्ष अदालत ने ओडिशा उच्च न्यायालय के आर्यमान पटनायक मामले, मद्रास उच्च न्यायालय के कन्नन मामले और केरल उच्च न्यायालय के अरुण के. थॉमस मामले में दिए गए विचारों से असहमति जताई। इन मामलों में औपचारिक गिरफ्तारी से पहले हिरासत में बिताई गई अवधि को 24 घंटे की समय-सीमा की गणना से बाहर रखने की अनुमति दी गई थी।