13 जनवरी 2000 से प्रकाशित
प्रातः कालीन समाचार पत्र, कोरबा

विष्णु भैया के लिए स्नेह की खास राखी, दीदियों ने रचनात्मकता से रचा आत्मीय उपहार

हुनर से आत्मनिर्भरता की नई पहचान, धान-चावल से बनी राखियों ने बटोरी सराहना

कोरबा 2026-08-22

आत्मनिर्भरता तब और सार्थक हो जाती है, जब हुनर के साथ स्थानीय संसाधनों को भी नई पहचान मिले। कोरबा जिले की महिला स्व सहायता समूह की दीदियां अपने परिश्रम, रचनात्मकता और नवाचार से इसी सोच को साकार कर रही हैं। बेला कछार, दोन्द्रों पंचायत का प्रसन्न स्व सहायता समूह इसका प्रेरक उदाहरण है, जहां महिलाओं ने धान, चावल, बर्रे भाजी और साबूदाना जैसे स्थानीय संसाधनों से आकर्षक और अनूठी राखियां तैयार की हैं।

वर्ष 2018 से बिहान से जुड़ा यह 22 सदस्यीय समूह महिला सशक्तिकरण और आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ा रहा है। समूह की दीदियां बाती, अगरबत्ती, कॉस्मेटिक सामग्री और कपड़ों से जुड़े कार्यों के साथ समय और मांग के अनुसार नए उत्पाद भी तैयार करती हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर उन्होंने पारंपरिक राखियों को स्थानीयता से जोड़ते हुए प्राकृतिक संसाधनों का रचनात्मक उपयोग किया है।

समूह की दीदियों श्रीमती नीतू कर्ष एवं श्रीमती मीरा देवांगन ने शहर में राखियों का स्टॉल लगा कर आकर्षक राखियों से सबका ध्यान खींच रही है।

प्रसन्न स्व सहायता समूह की दीदियों ने बताया कि महतारी वंदन योजना उनके लिए आर्थिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। उन्हें अब तक योजना की 30 किश्तें प्राप्त हो चुकी हैं। योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग वे अपनी आवश्यकताओं के साथ-साथ आजीविका से जुड़े कार्यों में भी कर रही हैं। नियमित आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने छोटे-बड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में सहयोग दिया है और आत्मविश्वास को भी मजबूत किया है।

रक्षाबंधन के अवसर पर दीदियों ने विष्णु भैया के लिए भी विशेष राखी तैयार की है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से मिल रहे सहयोग के लिए वे अपने विष्णु भैया के प्रति आभार व्यक्त करती हैं।

प्रसन्न स्व सहायता समूह की यह पहल बताती है कि जब महिलाओं को अवसर, सहयोग और प्रोत्साहन मिलता है, तो उनका हुनर आजीविका और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन सकता है। स्थानीय संसाधनों से तैयार ये राखियां ग्रामीण महिलाओं की रचनात्मकता, मेहनत और आत्मनिर्भर बनने की भावना की खूबसूरत पहचान बनकर सामने आई हैं।