13 जनवरी 2000 से प्रकाशित
प्रातः कालीन समाचार पत्र, कोरबा

जशक्राफ्ट के माध्यम से हस्तशिल्प को मिलेगी नई पहचान, आधुनिक प्रशिक्षण से बढ़ेगी आजीविका और रोजगार

जशपुरनगर 2026-07-12

जशपुर जिले में जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण आजीविका एवं पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पहचान दिलाने की दिशा में लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जशक्राफ्ट ब्रांड को सुदृढ़ करने तथा बांस हस्तशिल्प से जुड़े परिवारों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से विकासखंड जशपुर की ग्राम पंचायत झोलांगा में एक माह का आवासीय बांस हस्तशिल्प प्रशिक्षण 29 जून से 29 जुलाई तक आयोजित किया जा रहा है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कलेक्टर श्री रोहित व्यास के नेतृत्व एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत श्री अभिषेक कुमार के मार्गदर्शन में जिला पंचायत जशपुर तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान), जनपद पंचायत जशपुर द्वारा संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से बांस हस्तशिल्प से जुड़े लगभग 150 परिवारों के आजीविका संवर्धन का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में 46 महिलाओं के प्रथम बैच को आवासीय प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

प्रशिक्षण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रतिभागियों को आधुनिक मशीनों के उपयोग, नवीन डिजाइनों तथा वर्तमान बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए गुजरात के सूरत जिले से अनुभवी विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षकों को आमंत्रित किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान फैंसी ट्रे, गुलदस्ते, माचिया, सजावटी उत्पाद, चटाई, आकर्षक टोकरियां, फर्नीचर, सोफा, पलंग सहित अनेक आधुनिक एवं उपयोगी बांस उत्पादों का निर्माण सिखाया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि जशपुर एवं मनोरा विकासखंड में लगभग 250 परिवार वर्षों से बांस हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी आजीविका अर्जित कर रहे हैं। इस कार्य में पुरुषों के साथ-साथ बड़ी संख्या में बिहान स्व-सहायता समूहों की महिलाएं भी सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। जिला प्रशासन द्वारा इन समूहों को चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ), बैंक लिंकेज तथा मुद्रा ऋण जैसी वित्तीय सुविधाओं से जोड़कर उनके उद्यमों को मजबूती प्रदान की जा रही है। साथ ही समय-समय पर कौशल उन्नयन एवं उद्यमिता विकास संबंधी प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

जशक्राफ्ट ब्रांड के अंतर्गत तैयार हस्तशिल्प उत्पादों को रूरल मार्ट, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों तथा देश के विभिन्न बाजारों से जोड़ने के लिए डिजाइन एवं विपणन विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही हैं, जिससे स्थानीय कारीगरों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके।

जिला प्रशासन का लक्ष्य आगामी वर्ष तक हस्तशिल्प से जुड़े सभी स्व-सहायता समूहों के सदस्यों को लखपति दीदी की श्रेणी में लाना है। यह पहल न केवल पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने का माध्यम बनेगी, बल्कि महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन, जनजातीय परिवारों की आय वृद्धि तथा आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।