रायपुर 2026-05-06
नई श्रम संहिताओं के तहत 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के श्रमिकों के लिए अनिवार्य और निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच की राष्ट्रव्यापी पहल का शुभारंभ 07 मई 2026 को किया जाएगा। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत नई दिल्ली स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, बसईदारापुर से करेंगे। इस अवसर पर देशभर के विभिन्न हिस्सों में स्थित 11 प्रमुख ईएसआई अस्पतालों में एक साथ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे यह पहल एक समन्वित राष्ट्रीय अभियान के रूप में लागू हो सके।
इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित ईएसआई अस्पताल, रावाभाटा में राज्य स्तरीय मुख्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में राज्य के श्रम विभाग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रमिक शामिल होंगे। आयोजन के माध्यम से प्रदेश के हजारों बीमित श्रमिकों को इस निःशुल्क स्वास्थ्य जांच सुविधा का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "श्रमेव जयते" दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें श्रम की गरिमा को सर्वोपरि मानते हुए श्रमिकों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने पर बल दिया गया है। नवंबर 2025 में अधिसूचित चार नई श्रम संहिताओं के तहत यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार व्यापक स्तंभों—वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा—में समाहित किया गया है। इन सुधारों का उद्देश्य न केवल अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाना है, बल्कि रोजगार के औपचारिककरण को बढ़ावा देना और श्रमिकों को अधिक सुरक्षित एवं संरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना भी है।
विशेष रूप से, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के माध्यम से असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाया गया है। इसके तहत एक समर्पित सामाजिक सुरक्षा कोष की स्थापना की गई है और ईएसआईसी के लाभों को अधिक व्यापक बनाया गया है। इसी कड़ी में 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के श्रमिकों के लिए अनिवार्य वार्षिक स्वास्थ्य जांच का प्रावधान किया गया है, जिससे उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी सुनिश्चित हो सके।
इस स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बीमारियों का प्रारंभिक चरण में पता लगाना, निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देना और श्रमिकों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। नियमित जांच के माध्यम से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग जैसी गैर-संचारी बीमारियों की पहचान समय रहते की जा सकेगी, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को कम किया जा सकेगा।
इसके अलावा, रसायनों, विषाक्त पदार्थों या भारी मशीनरी के साथ कार्य करने वाले जोखिमपूर्ण कार्यों में लगे श्रमिकों के लिए आयु की परवाह किए बिना नियमित चिकित्सा जांच अनिवार्य की गई है। यह प्रावधान कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों को और अधिक मजबूत करेगा तथा व्यावसायिक रोगों की रोकथाम में सहायक होगा।
इस पहल के अंतर्गत श्रमिकों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का डिजिटल और व्यवस्थित रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति की समय-समय पर समीक्षा की जा सके। यह प्रणाली भविष्य में नीतिगत निर्णय लेने और स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर प्रबंधन में भी सहायक सिद्ध होगी।
कुल मिलाकर, यह राष्ट्रव्यापी पहल भारत के श्रमिक वर्ग के स्वास्थ्य और कल्याण को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल श्रमिकों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि देश की उत्पादकता और आर्थिक विकास को भी बल मिलेगा। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में यह कार्यक्रम एक सशक्त आधार प्रदान करता है।