रायपुर 2026-06-09
आज दिनांक 09.06.2026 को मंत्रि-परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (CSPTCL) में आमजन / निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने हेतु कम्पनी के शेयर्स का इनीशियल पब्लिक आफरिंग (IPO) प्रक्रिया के माध्यम से लिस्टिंग करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
2/ राज्य शासन की शत-प्रतिशत अंशधारित एवं ऊर्जा विभाग अन्तर्गत संचालित छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत पारेषण कंपनी लिमिटेड (CSPTCL) द्वारा राज्य में विद्युत संरचना के विकास हेतु किये जा रहे पूँजीगत कार्यों / निवेश में आमजन की भागीदारी बढ़ाने हेतु कम्पनी के शेयर्स का इनीशियल पब्लिक आफरिंग (IPO) प्रक्रिया के माध्यम से लिस्टिंग करने के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद द्वारा सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई एवं इस कार्य के लिये हेतु पारेषण कंपनी के संचालक मंडल को समस्त प्रक्रिया पूर्ण करने एवं इस कार्य में जो भी आवश्यक अनुषांगिक कार्य संपादित करने या निर्णय लेने की आवश्यकता हो, उन्हें करने के लिये पूर्णतः अधिकृत की गई। साथ ही उपरोक्त कार्य हेतु निर्देश / निर्णय जारी करने हेतु ऊर्जा विभाग को अधिकृत किया गया।
3/ शासन के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनियां जिनका आर्थिक एवं तकनीकी परिचालन अच्छा है एवं निरन्तर लाभ अर्जन की स्थिति में है, उन कंपनियों के शेयर्स को देश के स्टाक एक्सचेंस में लिस्टिंग करके अंशपूंजी का एक हिस्सा सामान्य पब्लिक / निवेशक द्वारा खरीदे जाने पर कम्पनी के विस्तार में जनभागीदारी की वृद्धि होती है तथा कंपनी को भविष्य के पूँजीगत कार्यों के लिए राशि की उपलब्धता में सुगमता होती है साथ ही कंपनी के परिचालन में पारदर्शिता तथा गवर्नेस में सकारात्मक लाभ होता है।
4/ इस विषय पर भारत सरकार, द्वारा छत्तीसगढ़ के विद्युत क्षेत्र में प्रचालनात्मक पारदर्शिता एवं वित्तीय प्रबंधन में सुधार हेतु जारी प्रयासों के आलोक में, राज्य के स्वामित्व वाली विद्युत युटिलिटी के सार्वजनिक सूचीकरण से निष्पादन को बनाये रखने, पूंजी निवेश में तेजी लाने, वितरण और संरचना के आधुनिकीकरण तथा दीर्घकालिक स्थिरता के लिये कार्पोरेट गर्वनेंस को सुदृढ़ करने के अवसर हेतु सार्वजनिक सूचीकरण बाबत् आवश्यक कार्यवाही के निरंतर निर्देश प्राप्त हो रहे थे। इसी कड़ी में पारेषण कंपनी हेतु निर्णय लिया गया।
5/ यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि पूर्व में भारत सरकार के अन्तर्गत संचालित कंपनियां यथा- एनटीपीसी पॉवर ग्रिड, एसजेव्हीएन लिमिटेड, एनएचपीसी लिमिटेड आदि का भारत सरकार द्वारा सफलतापूर्वक शेयर लिस्टिंग किया जा चुका है और ये सभी शासकीय कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर रही है। इसी तारतम्य में राज्य शासन के स्वामित्व वाली पारेषण कंपनी के शेयर्स की लिस्टिंग महत्वपूर्ण कदम है ताकि राज्य शासन की इस कंपनी को लिस्टिंग से जुड़े लाभ यथा पूंजी की उपलब्धता, मार्केट विजिब्लिटी, बेहतर संचालन इत्यादि का लाभ मिल सके।
6/ पारेषण कंपनी के संचालक मंडल द्वारा यह निर्णय लेने के पूर्व पूंजी क्षेत्र की विशेषज्ञ फर्म मेसर्स एस.बी.आई. केपीटल लिमिटेड से फिजिब्लिटी स्टडी कराई गई जिसके निष्कर्ष के अनुसार कंपनी के शेयर्स को आईपीओ के माध्यम से स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया जाना संभव, साध्य एवं सफलता योग्य है। हमारी कपंनी के विगत 5 वर्षों के लेखा-जोखा एवं वित्तीय प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। इसके आधार पर भारत की प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी India Ratings and Research (Ind&Ra), FitchGroup ने कंपनी के बैंक ऋण और वित्तीय सुविधाओं के लिए लगातार 'IND A/Stable' एवं भारत सरकार की ऊर्जा क्षेत्र की वित्तीय संस्था मेसर्स पावर फाइयनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा विगत 2 वर्षों से A++ रेटिंग दी गई है जो कि उनकी उच्चतम रेटिंग है।
7/ प्रदेश की बढ़ती हुई ऊर्जा आवश्यकताओं एवं उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत प्रदाय सुनिश्चित करने की दृष्टि से ट्रांसमिशन कम्पनी को छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा नेटवर्क विस्तार के लिए आगामी 4 वर्षों हेतु विभिन्न अति उच्चदाब की सबस्टेशन एवं पारेषण लाइन बनाने इत्यादि में लगभग 15 हजार करोड़ रूपये के निवेश योजना की स्वीकृति दी गई है। आज के निर्णय से पूंजीगत कार्यों हेतु राशि की व्यवस्था करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी एवं बढ़ती हुई ऊर्जा मांग के पूर्ति के दिशा में सभी कार्य को समयबद्ध पूर्ण किया जा सकेगा।
सेन्ट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथारिटी द्वारा प्रकाशित "मैनुअल ऑन ट्रांसमिशन प्लानिंग" के अनुसार ट्रांसमिशन प्रणाली को (N-1) सेक्योरिटी लेवल स्थापित करना है। अर्थात किसी एक लाइन या ट्रांसफार्मर के बंद हाने से विद्युत प्रदाय बाधित नहीं होना चाहिए। नियामक आयोग द्वारा स्वीकृत योजना में (N-1) सेक्योरिटी लेवल को स्थापित व बढ़ती हुई मांग के साथ भी जारी रखने हेतु आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
8/ आईपीओ (IPO) / Listing के अपने अनेक लाभ है, जैसे कि कम लागत वाली पूंजी (Low-cost Capital) पीएसयू को अपने विस्तार, आधुनिकीकरण या बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास के लिए राज्य सरकार के बजट पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। वह सीधे बाजार से कम लागत वाली इक्विटी पूंजी जुटा सकता है। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बहुत बड़े निवेश (जैसे रू. 15,000 करोड़ से अधिक का निवेश योजना) की आवश्यकता है। लिस्टिंग के बाद, कंपनी नए शेयर जारी करके दीर्घकालिक फंड जुटा सकती है। लिस्टिंग से कंपनी की वास्तविक बाजार कीमत (Market Cap) का पता चलता है। इससे राज्य सरकार को अपनी छिपी हुई संपत्ति (Hidden Assets) के सटीक मूल्य का अंदाजा होता है। सेबी (SEBI) (सिक्योरिटी एण्ड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) और स्टॉक एक्सचेंजों के कड़े नियमों के कारण कंपनी में स्वतंत्र निदेशकों (Independent Directors) की नियुक्ति होती है। इससे पारदर्शिता बढ़ती है और वित्तीय प्रबंधन मजबूत होता है। विशेष रूप से पावर ट्रांसमिशन, इंफ्रास्ट्रक्चर या यूटिलिटी क्षेत्र के राज्य पीएसयू में जोखिम कम होता है। इस वजह से बड़े विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशक (FIls/DIIs) इनमें दीर्घकालिक निवेश करने के लिए आकर्षित होते हैं।
9/ आईपीओ (IPO)/Listing से निवेशकों के प्रति कंपनी के दायित्व बढ़ जाते है। लिस्टिंग के बाद कंपनी को तिमाही वित्तीय परिणाम घोषित करने होते हैं और सेबी के LODR (लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एण्ड डिसक्लोजर रिक्वायरमेंट) नियमों का कड़ाई से पालन करना होता है।
10/ उक्त सभी बिन्दुओं पर विचार-विमर्श उपरांत मंत्रि-परिषद् द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत पारेषण कंपनी लिमिटेड (CSPTCL) को इनीशियल पब्लिक आफरिंग (IPO) प्रक्रिया के माध्यम से अपने शेयर्स को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग करने हेतु अनुमति प्रदान की गई है। यहां स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि पारेषण कंपनी पर राज्य शासन का नियंत्रण पूर्ववत् बना रहेगा। राज्य के हितों को सर्वोपरि रखा जायेगा एवं कर्मचारी / अधिकारियों के कार्यप्रणाली में कोई अंतर नहीं आयेगा। जबकि अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के तर्ज पर पारेषण कपंनी और बेहतर प्रदर्शन करेगी।
11/ समग्र लाभों को ध्यान में रखते हुए, आईपीओ की संरचना को नए इक्विटी शेयरों (लगभग 5%) के निर्गमन और राज्य सरकार की मौजूदा शेयरधारिता (5%) की विनिवेश के प्रस्ताव के संयोजन के रूप में अनुशंसित किया जा सकता है, ताकि प्रमोटरों की हिस्सेदारी के न्यूनतम 10% विचलन (डायलूशन) की लिस्टिंग आवश्यकता को पूरा किया जा सके।