मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में जशपुर जिला तेजी से एक उभरते पर्यटन स्थल के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है।
जशपुर अपनी प्राकृतिक सौंदर्य, हरि भरी वादियां नदी, पहाड़ झरने आदिवासी संस्कृति रहन-सहन लोक संस्कृति से परिपूर्ण, शहरों के भागदौड़ की जिन्दगी से दूर सुकुन बिताने के लिए जशपुर लोगों को अपनी ओर सहज ही आकर्षित करता है।
पर्यटन की बात करें तो जशपुर में ऐसे कई पर्यटन स्थल हैं जहां आकर मन को एक अलग सुकुन की अनुभूति कराता है। जशपुर जिले में देश देखा,रानीदाह जलप्रपात ,चाय बगान,दमेरा, कुनकुरी विकास खंड में मयाली नेशचर कैम विश्व सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर पहाड़, बगीचा...
छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अपनी प्राकृतिक संपदा, घने वनों, पहाड़ियों और मनमोहक जलप्रपातों के लिए पूरे प्रदेश में विशेष पहचान रखता है। इन्हीं प्राकृतिक धरोहरों में शामिल है रानीदाह जलप्रपात, जो अपनी अलौकिक सुंदरता, शांत वातावरण और ऐतिहासिक लोककथाओं के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। जशपुर नगर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह पर्यटन स्थल प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफी के शौकीनों और रोमांच पसंद पर्यटकों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
रानीदाह तक पहुँचने का सफर भी अपने आप में यादगार अनुभव है। हरियाली से आच्छादित पहाड़ियों, घने साल के जंगलों और घुमावदार खूबसूरत सड़कों से गुजरते हुए जैसे ही पर्यटक इस स्थल पर पहुँचते हैं, सामने ऊँची चट्टानों से गिरती ...
दशकों तक, भारत की नियामक प्रणाली नागरिकों को गहरे अविश्वास की नज़र से देखती थी। नागरिकों को मामूली, प्रक्रियात्मक गलतियों या किसी अधिकारी के केवल शक के आधार पर अपराधी मान लिया जाता था। एक सुखद बदलाव के तौर पर, मोदी सरकार ने आम आदमी के लिए भरोसे और सहानुभूति पर आधारित नीतियां बनाई हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों और व्यवसायों का समर्थन करने, अनुपालन को सरल बनाने और व्यवसायों के सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को स्वीकार करते हुए भारत के कानूनी परिदृश्य में सुधार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। चाहे अनुपालन बोझ कम करना हो, डिजिटलीकरण हो, या एकल-खिड़की मंजूरी हो, कुल मिलाकर बदलाव का मकसद शासन को अधिक तर्कसंगत और कुशल बनाना रहा है। ...
किसी भी राष्ट्र की प्रगति का वास्तविक पैमाना उसकी सड़कों, भवनों और उद्योगों से नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से तय होता है जो अपने सबसे संवेदनशील नागरिकों की रक्षा करती है। गर्भवती महिलाएं और नवजात शिशु किसी भी समाज की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होते हैं। जब एक मां सुरक्षित रहती है तो केवल एक जीवन नहीं बचता, बल्कि एक पूरे परिवार, समाज और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
भारत ने पिछले एक दशक में मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में जिस परिवर्तनकारी यात्रा को तय किया है, वह विश्व स्वास्थ्य क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उदाहरण के रूप में उभरी है। इस परिवर्तन के केंद्र में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) है, जिसने गर्भवती महिलाओं तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक व्यापक राष्ट्रीय ...
"जो राज्य अपनी सीमाओं, साझेदारियों और व्यापार मार्गों की सुरक्षा नहीं करता, वह अपने भविष्य को भी सुरक्षित नहीं रख सकता।"
- कौटिल्य
कौटिल्य की यह सीख सदियों पहले ही शासन और रणनीति की मूल सोच का हिस्सा बन चुकी थी, और आज के समय में यह पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक होकर सामने आई है। आज देशों की परीक्षा केवल उनकी अर्थव्यवस्था के आकार या सैन्य ताकत से नहीं हो रही, बल्कि इस बात से हो रही है कि वे भूगोल को कितनी अच्छी तरह समझते हैं, भविष्य का कितना सही अनुमान लगाते हैं और अवसर के खतरे में बदलने से पहले कितनी तेजी से निर्णय लेते हैं। ग्रेट निकोबार भारत के लिए ऐसी ही एक बड़ी परीक्षा है।
यह भारतीय मानचित्र के दक्षिणी-पूर्वी छोर ...
भारत और ओमान के बीच वाणिज्यिक रिश्ते सदियों से चलते आ रहे हैं। दोनों देशों का एक साझा इतिहास प्राचीन नावों के पाल पर सवार होकर आगे बढ़ता रहा है और पीढ़ियों से चले आ रहे सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जरिए कायम रहा है। भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) इस सभ्यतागत बंधन को और मजबूत करता है। एक ऐसे दौर में जब वैश्विक व्यापार भू-राजनैतिक प्रतिद्वंद्विताओं, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और बढ़ते संरक्षणवाद से जूझ रहा है, यह समझौता भरोसेमंद साझेदारों के साथ आर्थिक जुड़ाव को गहरा करने के भारत के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। वर्ष 2022 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद, यह सीईपीए खाड़ी देशों के साथ भारत की बढ़ती आर्थिक भागीदारी को मजबूती से स्थापित करता है। द्विपक्षीय व्यापार में लगातार विस्तार हुआ ...
1 जून से लागू हो रहा भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस मिशन की एक निर्णायक उपलब्धि है, जिसका लक्ष्य नए बाजार खोलने और रोजगार सृजन को गति देने के जरिये भारत के छात्रों, कारीगरों, महिलाओं, किसानों, मछुआरों और एमएसएमई के लिए वैश्विक समृद्धि के मार्ग बनाना है।
भारत और ओमान के बीच गहरे आर्थिक संबंध हैं और लोगों के आपसी संबंध प्रगाढ़ हैं। ओमान में लगभग 7 लाख भारतीय रहते हैं, जिनमें वे व्यापारी परिवार भी शामिल हैं, जिनकी जड़ें 200–300 साल पुरानी हैं। ओमान से भारत को भेजी जाने वाली वार्षिक धनराशि लगभग 2 बिलियन डॉलर है, जबकि देश में 6,000 से अधिक भारतीय उद्यम कार्यरत हैं। दोनों देशों के बीच ...
छत्तीसगढ़ में सुशासन और नागरिक सुविधाओं को केंद्र में रखकर प्रशासनिक व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। इसी दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के नेतृत्व में पंजीयन विभाग में ऐतिहासिक एवं परिवर्तनकारी सुधारों की शुरुआत की गई है। राज्य सरकार का उद्देश्य पंजीयन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी, तकनीक आधारित तथा नागरिकों के लिए पूरी तरह सुविधाजनक बनाना है।
कभी लंबी कतारों, घंटों इंतजार, दस्तावेजों के सत्यापन में देरी और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने वाली पंजीयन प्रक्रिया अब पूरी तरह बदलती दिखाई दे रही है। पहले जहां एक साधारण रजिस्ट्री पूरी करने में 4 से 6 घंटे अथवा कई बार 1 से 2 दिन तक लग जाते थे, वहीं अब आधुनिक डिजिटल व्यवस्थाओं की मदद से यही ...
छत्तीसगढ़ की माटी में इन दिनों विकास और सुशासन की एक नई बयार बह रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य ने प्रगति की एक ऐसी छलांग लगाई है, जो न केवल छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदल रही है, बल्कि इसे देश के नक्शे पर विकसित भारत का एक चमकता हुआ रोल मॉडल भी बना रही है। केंद्र की दूरदर्शी नीतियों और राज्य सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति के मेल से छत्तीसगढ़ में आज डबल इंजन की सरकार धरातल पर साफ महसूस की जा रही है। विकास की इस नई इबारत में समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की खुशहाली सबसे ऊपर है।
गरीब का अपना घर: पहली प्राथमिकता, ठोस कदम
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सत्ता संभालते ही सबसे पहला ...
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिला खेती और बागवानी के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। पारंपरिक खेती के साथ अब किसान नगदी एवं फल फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। सेब, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी और काजू जैसी फसलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रही हैं। इनमें काजू उत्पादन किसानों के लिए आय का मजबूत और भरोसेमंद साधन बनकर उभरा है।
काजू की खेती से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था
जिला प्रशासन, उद्यान विभाग, रीड्स और नाबार्ड के संयुक्त प्रयासों से जिले में काजू उत्पादन का दायरा तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में जिले के लगभग 7800 किसान करीब 7800 एकड़ भूमि ...
बुद्ध के दो मुख्य शिष्यों - अरहंत सारिपुत्त और अरहंत महामोग्गल्लान - के पवित्र अवशेष १ से १० जून तक उलानबटोर के गंदन मठ में प्रदर्शनी के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) के एक विशेष विमान से मंगोलिया ले जाए जाएंगे ।
दो सहस्राब्दियों से अधिक समय से, बौद्ध जगत में अरहंत सारिपुत्त और अरहंत महामोग्गल्लान के नाम अत्यधिक श्रद्धा के केंद्र रहे हैं । गौतम बुद्ध के दो मुख्य शिष्यों के रूप में, वे न केवल बुद्ध के सबसे करीबी आध्यात्मिक साथी थे, बल्कि उनके ज्ञानोदय के बाद धम्म के प्रमुख रक्षक और प्रसारक भी थे ।
बौद्ध परंपरा के अनुसार...
मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार की जरूरत होती है, ठीक उसी प्रकार फसलों के बेहतर विकास और अधिक उत्पादन के लिए संतुलित पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है। पौधे ऑक्सीजन वायुमंडल और पानी से प्राप्त करते हैं, जबकि अन्य आवश्यक पोषक तत्व मिट्टी से लेते हैं। इनमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश प्रमुख पोषक तत्व हैं, जिनकी कमी अधिकांश खेतों की मिट्टी में पाई जाती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया को ही मिट्टी परीक्षण कहा जाता है। मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं में खेत की मिट्टी का वैज्ञानिक विश्लेषण कर फसल की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों की अनुशंसा की जाती है। इससे किसानों को ...
हमारे देश भर में फैले जंगलों, पहाड़ियों और दूरदराज की बस्तियों में, एक शांत लेकिन सफल परिवर्तन चल रहा है। जनजातीय समुदाय लंबे समय से भारत की विकास गाथा के केंद्र में अपने उचित स्थान का इंतजार कर रहे थे। आज वे राष्ट्र की प्रगति के सक्रिय वास्तुकार के रूप में उभर रहे हैं। जनजातीय गरिमा उत्सव की यही भावना है: विकसित भारत की यात्रा का एक राष्ट्रीय उत्सव, जहां प्रगति भूगोल या परिस्थिति का विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का समान रूप से अधिकार है।
महत्वाकांक्षा का पैमाना
यह समझने के लिए कि प्रौद्योगिकी जनजातीय विकास के लिए अपरिहार्य क्यों हो गई है, किसी को पहले चुनौती की व्यापकता को समझना चाहिए। ...
जब मैं तिरुप्पुर के स्कूल में पढ़ता था, तब मेरे मन में देश को लेकर कई सपने थे। मेरे मन में अक्सर ये सवाल उठते थे- भारत अपनी महानता कब वापस पाएगा? विश्व मंच पर एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में कब उभरेगा? हमारे गरीब और वंचित भाई-बहनों को सम्मानजनक जीवन कब मिलेगा? मुझे खुशी है कि किशोरावस्था में मेरे मन में जो विचार थे, वे अब साकार हो रहे हैं।
मैं अक्सर खुद को स्वामी विवेकानंद के इन शब्दों की याद दिलाता था, "उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको।" तमिलनाडु की धरती से स्वामीजी के दिए ये शब्द हर व्यक्ति में देशभक्ति और समर्पण की भावना जगाने की अपार शक्ति रखते हैं। मेरा हमेशा यह विश्वास रहा कि जब भारत अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ेगा, तब वह पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करने वाला राष्ट्र बनकर उभरेगा। पिछले एक दशक में ...
आज जब दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 मना रही है, मानवता एक निर्णायक सभ्यतागत मोड़ पर खड़ी है। वर्तमान में हम अभूतपूर्व तकनीकी और भौतिक प्रगति के युग में जी रहे हैं, फिर भी हम जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों, बढ़ते मानसिक तनाव, पर्यावरणीय क्षरण और जीवन जीने के अस्थिर तरीकों जैसी चुनौतियों का सामना भी कर रहे हैं। इनमें से कई संकटों के मूल में एक ही चुनौती नज़र आती है- वस्तुओं का अनियंत्रित और बिना सोचे-समझे किया जाने वाला उपभोग।
प्राकृतिक संसाधनों के ज़रुरत से ज्यादा दोहन से लेकर डिजिटल उपयोगिता पर अत्यधिक निर्भरता और अस्थिर जीवनशैली तक, आज आधुनिक समाज संतुलन से लगातार दूर होता जा रहा है। और इसी संदर्भ में, योग न केवल एक प्राचीन स्वास्थ्य अभ्यास के रूप में, बल्कि एक ज़िम्मेदार जीवन जीने के ...
भारत और इटली के संबंध अब एक निर्णायक दौर में पहुंच चुके हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में अभूतपूर्व तेजी से विस्तार हुआ है। यह संबंध केवल सौहार्दपूर्ण मित्रता तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अब स्वतंत्रता और लोकतंत्र के मूल्यों तथा भविष्य के साझा दृष्टिकोण पर आधारित एक विशेष रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं। ऐसे समय में, जब पूरी दुनिया की व्यवस्था बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है, इटली और भारत की साझेदारी उच्च राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर लगातार संवाद से आगे बढ़ रही है। यह संबंध अब एक नए और अधिक व्यापक स्तर पर पहुंच रहा है, जिसमें दोनों देशों की आर्थिक ताकत, सामाजिक रचनात्मकता और हजारों वर्षों पुरानी सभ्यतागत विरासत शामिल है।
हमारा सहयोग इस साझा समझ को दर्शाता है कि 21वीं ...
जय सोमनाथ !
वर्ष 2026 की शुरुआत में मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला। यह सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद भी मंदिर के शाश्वत और अविनाशी होने का पर्व था। अब 11 मई को मुझे एक बार फिर सोमनाथ जाने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। इस बार यह यात्रा पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में है। मैं उस क्षण को फिर जीने जा रहा हूं जब भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने मंदिर का लोकार्पण किया था। उस दिन, सोमनाथ में विध्वंस से सृजन तक की यात्रा फिर से जीवंत होगी। छह महीनों के भीतर सोमनाथ के इतिहास से जुड़े इन दो अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी बनना मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है।
सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, ...
सुशासन केवल प्रशासनिक दक्षता का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की संकल्पबद्ध प्रक्रिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ शासन का श्रम विभाग विगत दो वर्षों में इसी सुशासन की भावना को धरातल पर साकार करता हुआ दिखाई देता है। इस अवधि में श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, उनके जीवन को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने तथा उन्हें सामाजिक-आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए अनेक ऐतिहासिक और जनहितकारी कदम उठाए गए हैं।
विष्णु के सुशासन की स्पष्ट झलक श्रम विभाग द्वारा अपनाए गए डिजिटल नवाचारों में दिखाई देती है। प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ाने के उद्देश्य से समस्त
भारत एचआईवी/एड्स के खिलाफ अपनी लड़ाई में एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। पहली घटना की रिपोर्ट होने के चार दशकों बाद, देश ने राष्ट्रीय एचआईवी रोकथाम और उपचार कार्यक्रम का निर्माण किया है, जो दुनिया के सबसे व्यापक और मजबूत उपचार कार्यक्रमों में से एक है। राष्ट्रीय एड्स और एसटीडी नियंत्रण कार्यक्रम (एनएसीपी) ने निर्विवाद उपलब्धियाँ हासिल की हैं। नई संक्रमण दर 2010 की तुलना में लगभग आधी रह गई है, एड्स से संबंधित मृत्यु दर में 80% की कमी दर्ज की गयी है, उपचार पर रहने वाले लोगों में वायरस नियंत्रण अब 97% से अधिक है और भारत ने पूरी तरह से डोल्यूटेग्राविर-आधारित उपचार योजनाओं को अपनाने के साथ बड़ा बदलाव किया है—जिससे यह उपचार प्रभावकारिता में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।
भारत की सामाजिक और राजनीतिक संरचना को आकार देने में जनजातीय समुदायों ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इतिहास साक्षी है कि जनजातीय नेताओं ने अपने भूमि, संस्कृति और गरिमा की रक्षा के लिए, औपनिवेशिक शोषण और अन्याय के विरुद्ध शक्तिशाली आंदोलनों का नेतृत्व किया। अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध से लेकर बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ तक, भारत में विभिन्न जनजातीय समुदायों ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन, स्थानीय जमींदारों और महाजनों के खिलाफ विद्रोह किया, जिन्होंने उनके पारंपरिक जीवन-प्रणाली को बाधित किया था।
भगवान बिरसा मुंडा द्वारा संचालित उलगुलान आंदोलन से लेकर अल्लूरी सीताराम राजू, टंट्या भील, वीर गुंडाधुर, रानी गाइदिनल्यू, रामजी गोंड, शहीद वीर नारायण
पहलगाम में हुआ नरसंहार केवल निर्दोष लोगों के जीवन पर हमला नहीं था- यह भारत की अंतरात्मा पर भी किया गया आक्रमण था। इसके प्रत्युत्तर में भारत ने आतंकवाद-रोधी कार्रवाई की नियम पुस्तिका के पुनर्लेखन का निर्णय लिया। ऑपरेशन सिंदूर राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों की रक्षा के लिए मोदी सरकार की न बर्दाश्त करने और कोई समझौता नहीं करने की नीति यानी मोदी सिद्धांत की सबसे स्पष्ट अभिव्यक्ति है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने टेलीविजन पर राष्ट्र के नाम संबोधन में आतंकवाद से निपटने के लिए अपने इस सिद्धांत की रूपरेखा प्रस्तुत की। हाल की घटनाओं के आधार पर निर्मित यह सिद्धांत आतंकवाद और बाहरी खतरों पर भारत की प्रतिक्रिया के लिए निर्णायक तौर-तरीके निर्धारित करता है।
भारत का सहकारिता आंदोलन सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में गहराई से निहित है। यह आंदोलन समावेशी विकास, सामुदायिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के लिए एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में विकसित हुआ है। सहकारिता मंत्रालय की स्थापना और इसकी नवीनतम पहलों के माध्यम से सरकार ने एक सहकारिता-संचालित मॉडल को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है, जो देश के हर कोने तक पहुंचेगा और समाज की मुख्यधारा से अलग पड़े समुदायों के लिए स्थायी आजीविका और वित्तीय समावेशन की सुविधा प्रदान करेगा। दिनांक 6 जुलाई 2021 को सहकारिता मंत्रालय की स्थापना भारत के सहकारी आंदोलन में एक
वक्फ संपत्तियां समुदाय के कल्याण के लिए होती हैं और यह कल्याण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा या धार्मिक उद्देश्यों से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, जमीन हड़पने, फर्जी दावों और राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्तियों द्वारा दुरुपयोग के मामलों ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। गरीबों की मदद करने के बजाय, इन संपत्तियों का इस्तेमाल अक्सर निजी लाभ के लिए किया जाता रहा है। यह नया विधेयक सुनिश्चित करता है कि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा की जाए और उनका इस्तेमाल इच्छा के मुताबिक किया जाए।
वक्फ संशोधन विधेयक 2024, वक्फ संपत्तियों में कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और अतिक्रमण के लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों का समाधान करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण विधायी कदम है। ये प्रस्तावित संशोधन
प्रामाणिक कहानियों और रचनात्मक मनोरंजन की भूखी दुनिया में, भारत वैश्विक मीडिया परिदृश्य में क्रांति लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। विश्व दृश्य-श्रव्य एवं मनोरंजन शिखर सम्मेलन (वेव्स) महज मीडिया और मनोरंजन से जुड़ा एक हितधारक भर नहीं है - यह एक ऐसे परिवर्तनकारी दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है जो दुनिया भर में रचनाकारों, नीति-निर्माताओं और दर्शकों के कंटेंट के साथ जुड़ने के तौर-तरीके को नए सिरे से परिभाषित करेगा। आगामी 1-4 मई, 2025 को मुंबई में आयोजित होने वाला वेव्स, संभवतः सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा रचनाकारों के इकोसिस्टम के लिए शुरू की गई एक ऐसी बेहद दूरदर्शी पहल के रूप में उभर कर सामने